द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : भारत के दो बार उपराष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी के हालिया बयान ने एक बार फिर देश की राजनीति में उबाल ला दिया है। मध्यकालीन शासकों महमूद गजनी और लोदी वंश को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर पहले ही सियासी प्रतिक्रियाएं सामने आ चुकी थीं, अब इस मुद्दे में विश्व हिन्दू परिषद (VHP) की एंट्री के बाद विवाद और गहरा गया है। VHP ने अंसारी पर सीधा हमला बोलते हुए उनके बयान को न सिर्फ इतिहास से खिलवाड़, बल्कि हिंदू भावनाओं पर चोट बताया है।
VHP ने कहा – महमूद गजनी को ‘स्वदेशी’ बताना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विश्व हिन्दू परिषद के प्रतिनिधि विनोद बंसल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दो बार उपराष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी द्वारा 17 बार भारत पर आक्रमण करने वाले महमूद गजनी को “स्वदेशी” बताना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। बंसल ने सवाल उठाया कि सोमनाथ, मथुरा और नालंदा जैसे धर्म और ज्ञान के पवित्र केंद्रों को लूटने और नष्ट करने वाले व्यक्ति का महिमामंडन क्या किसी पूर्व उपराष्ट्रपति को शोभा देता है।
VHP प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि हामिद अंसारी का “कांग्रेस प्रेम” एक बार फिर जाग गया है। उनके अनुसार, ऐसे बयान यह संकेत देते हैं कि अंसारी कांग्रेस में दोबारा स्वीकार्यता पाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद जब तक ऐसे आक्रांताओं का गुणगान नहीं किया जाएगा, तब तक कांग्रेस में वापसी संभव नहीं दिखती, इसलिए इस तरह की बयानबाजी की जा रही है।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, पूरा विवाद हामिद अंसारी के हालिया इंटरव्यू से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन शासकों को भारतीय इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में विदेशी आक्रमणकारी बताया जाता है चाहे वे लोदी हों या महमूद गजनी वे बाहर से आए हुए विदेशी नहीं थे, बल्कि यहीं के थे। उन्होंने यह भी कहा था कि राजनीतिक दृष्टि से उन्हें विदेशी बताना सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से ऐसा कहना सही नहीं है। इसी बयान ने सियासी और वैचारिक बहस को हवा दे दी।
इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी भी हमलावर है। बीजेपी प्रवक्ता सीआर केसवन ने एक्स पर हामिद अंसारी का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि आठवीं शताब्दी से लेकर मुगल काल तक हिंदू धर्मस्थलों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बर्बर महमूद गजनी ने 11वीं शताब्दी में 17 बार भारत पर हमला किया, मथुरा मंदिर को नष्ट किया और सोमनाथ मंदिर के ज्योतिर्लिंग को तोड़ा।
हामिद अंसारी के बयान पर केसवन ने भी दी कड़ी प्रतिक्रिया
केसवन ने कांग्रेस पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि क्या नेहरू की कांग्रेस, जिसने कभी सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था, आज ऐसी टिप्पणियों से सहमत है जो उन क्रूर आक्रमणों को सामान्य ठहराने का प्रयास करती हैं। उनके मुताबिक, इस तरह के बयान सनातन संस्कृति की नींव को कमजोर करने की सोच को दर्शाते हैं।
गौरतलब है कि हामिद अंसारी के बयान पर लगातार बढ़ती प्रतिक्रियाओं से साफ है कि यह मुद्दा केवल ऐतिहासिक व्याख्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह वैचारिक टकराव और राजनीतिक ध्रुवीकरण का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में इस बयान को लेकर सियासी तापमान और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

