द लोकतंत्र/ पटना : सारण की सियासत इस बार एक नए और रोचक मोड़ पर पहुंच गई है। विधानसभा चुनाव 2025 में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं चुनावी मैदान में उतरी हैं। जहां एक ओर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने तीन सीटों पर महिलाओं को टिकट देकर बड़ा दांव खेला है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी अपनी ओर से एक महिला उम्मीदवार को उतारकर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
जिले की कुल 10 विधानसभा सीटों में से तीन पर प्रमुख दलों द्वारा महिला प्रत्याशी उतारे जाने से यह चुनाव चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे न सिर्फ महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम बता रहे हैं, बल्कि यह भी मान रहे हैं कि अब महिलाएं राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार हैं।
बनियापुर से चांदनी सिंह, परसा से करिश्मा राय
राजद ने बनियापुर से चांदनी सिंह, परसा से करिश्मा राय और छपरा से भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव की पत्नी चंदा देवी को टिकट दिया है। भाजपा ने भी छपरा सीट से पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष छोटी कुमारी को मैदान में उतारा है। यानी छपरा में अब महिला बनाम महिला की सीधी जंग देखने को मिलेगी।
लेकिन चुनावी तस्वीर को और रोमांचक बना दिया है भाजपा की बागी नेता राखी गुप्ता ने, जिन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है। इससे यह मुकाबला अब त्रिकोणीय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी यह सीट चर्चा का केंद्र बन चुकी है, जहां लोग इसे “महिला शक्ति की चुनावी दस्तक” के रूप में देख रहे हैं।
महिलाओं की भागीदारी ने चुनावी माहौल को बदल दिया है
2010 के परिसीमन के बाद यह पहला मौका है जब सारण में इतनी संख्या में महिला प्रत्याशी चुनाव लड़ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बदलाव न केवल समाज में लैंगिक समानता की दिशा में संकेत देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि महिलाएं अब सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि निर्णयकर्ता की भूमिका में आ रही हैं।
स्थानीय मतदाताओं का कहना है कि जब महिलाएं शिक्षा, व्यवसाय, प्रशासन और खेल के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुकी हैं, तो राजनीति में उनकी भागीदारी भी स्वाभाविक और आवश्यक है। कई लोगों का मानना है कि महिलाओं के आने से राजनीति में संवाद, संवेदनशीलता और नई सोच का विस्तार होगा।
अब देखना यह होगा कि मतदाता इस नई सोच और महिला नेतृत्व को कितना समर्थन देते हैं। लेकिन इतना तो तय है कि इस बार सारण की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी ने चुनावी माहौल को नई दिशा, नई ऊर्जा और एक प्रेरक संदेश दे दिया है कि राजनीति अब सिर्फ पुरुषों का क्षेत्र नहीं रही।

