द लोकतंत्र/ लखनऊ : उत्तर प्रदेश की सियासत में वाराणसी के मणिकर्णिका घाट से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। घाट के पुनर्विकास को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुई कथित AI-जनरेटेड तस्वीरों के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “झूठा” करार दिया है। अजय राय ने मीडिया से बातचीत में साफ शब्दों में कहा कि मणिकर्णिका घाट को लेकर मुख्यमंत्री जो बयान दे रहे हैं, वे सच्चाई से कोसों दूर हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरें फर्जी और AI से बनाई गई हैं, तो अहिल्याबाई होल्कर से जुड़े परिवार की ओर से सामने लाई गई तस्वीरों को भी क्या सरकार AI-जनरेटेड कहेगी? अजय राय ने कहा कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए AI और फर्जी तस्वीरों का बहाना बना रही है, जबकि असल मुद्दा यह है कि वाराणसी जैसे पवित्र शहर में परंपरा, आस्था और विरासत के साथ छेड़छाड़ की जा रही है।
मणिकर्णिका घाट को लेकर दर्ज हुईं 8 FIR, राजनीति और तेज
वाराणसी के चौक थाने में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की गई कथित भ्रामक तस्वीरों के मामले में 8 एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस का कहना है कि इन तस्वीरों के जरिए धार्मिक भावनाएं आहत करने, लोगों को गुमराह करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की गई। प्रशासन का दावा है कि तस्वीरें AI से बनाई गई थीं और उनका वास्तविक परियोजना से कोई लेना-देना नहीं है।
हालांकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार खुद स्पष्ट नहीं है, तो आम जनता और विपक्ष को दोषी ठहराना गलत है। उन्होंने कहा कि वाराणसी सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, और ऐसे मुद्दों पर पारदर्शिता जरूरी है।
‘जब मुख्यमंत्री ही झूठ बोल रहे हों…’
अजय राय ने आगे कहा, “जब मुख्यमंत्री ही झूठ बोल रहे हों, तो फिर अधिकारियों से क्या अपेक्षा की जाए?” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सच को दबाने के लिए पुलिस कार्रवाई का सहारा ले रही है और असली सवालों से ध्यान भटका रही है। राय के मुताबिक, यह पूरा मामला प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक दबाव का उदाहरण बनता जा रहा है।
समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन द्वारा इंटरनेट और युवाओं को लेकर दिए गए विवादित बयान पर अजय राय ने अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बयान की जानकारी नहीं है और वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
यूपी सरकार पर लगातार बढ़ रहा दबाव
मणिकर्णिका घाट विवाद अब केवल AI तस्वीरों तक सीमित नहीं रहा है। यह मुद्दा सरकार की कार्यशैली, पारदर्शिता और धार्मिक स्थलों के पुनर्विकास के तरीके पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार असहमति की आवाज़ को दबाने के लिए कानून का इस्तेमाल कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष इसे अफवाहों और भ्रामक प्रचार के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है।
फिलहाल, मणिकर्णिका घाट का यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए सियासी टकराव का केंद्र बन गया है, जिसमें आने वाले दिनों में और बयानबाज़ी तेज होने के आसार हैं।

