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मोकामा: बाहुबली अनंत सिंह की धमाकेदार वापसी, छठी बार जीते चुनाव

Mokama: Bahubali Anant Singh makes a grand comeback, wins election for the sixth time

द लोकतंत्र/ पटना : मोकामा विधानसभा सीट इस बार भी बिहार की सियासत का सबसे चर्चित केंद्र बनी रही, और सभी विवादों और तनावों के बीच अंतत: बाहुबली नेता अनंत सिंह ने अपनी पकड़ फिर साबित कर दी। चुनाव से पहले जिस तरह पीयूष प्रियदर्शी और अनंत सिंह के काफिलों के बीच टकराव, पथराव और गोलीबारी हुई थी, उसमें जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की मौत के बाद माहौल बेहद गर्म हो गया था।

जेल में बंद अनंत सिंह जीते चुनाव

एफआईआर दर्ज होने के बाद अनंत सिंह को न्यायिक हिरासत में भेजा गया और पूरी चुनावी अवधि वे जेल में ही रहे, लेकिन इसके बावजूद जनता ने उन्हें भारी मतों से जीत दिलाकर यह साफ कर दिया कि मोकामा में उनकी राजनीतिक पकड़ अब भी ‘अनंत’ है। अनंत सिंह ने इस चुनाव में अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी आरजेडी उम्मीदवार और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को बड़े अंतर से हराया।

कुल 26 राउंड की गिनती में अनंत सिंह को 91,416 वोट मिले, जबकि वीणा देवी को 63,210 वोट मिले। फाइनल आंकड़ों में मामूली बदलाव की संभावना जरूर है, लेकिन जीत का अंतर इतना बड़ा है कि नतीजा साफ तौर पर उनके पक्ष में ही रहा। इस जीत के साथ अनंत सिंह ने मोकामा से लगातार छठी बार जीत का रिकॉर्ड बना दिया।

छठी बार जीत, मोकामा में ‘अनंत’ प्रभाव कायम

मोकामा सीट का इतिहास भी बताता है कि यह हमेशा बाहुबली नेताओं का गढ़ रहा है। 1990 और 1995 में अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह जनता दल के टिकट पर जीतकर मंत्री बने थे। 2000 में सूरजभान सिंह ने दिलीप सिंह को हराकर सीट अपने कब्जे में ली। इसके बाद 2005 में जेडीयू के टिकट पर पहली बार अनंत सिंह मैदान में उतरे और सूरजभान को हराकर मोकामा की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया। उसी वर्ष हुए पुन: चुनाव में भी वे जीते और फिर 2010 में भी जेडीयू के टिकट पर जीत दर्ज की।

2015 में पार्टी से अलग होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने पर भी उनकी लोकप्रियता में कमी नहीं आई और उन्होंने फिर जीत हासिल की। 2020 में वे आरजेडी से चुनाव लड़े और पांचवीं बार विधायक बने। हालांकि 2022 में कोर्ट की सजा की वजह से उनकी सदस्यता चली गई थी, जिसके बाद उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी आरजेडी से जीतीं, लेकिन बाद में 2025 के फ्लोर टेस्ट में वे एनडीए में शामिल हो गईं। कोर्ट से बरी होने के बाद अनंत सिंह ने इस चुनाव में जेडीयू प्रत्याशी के रूप में वापसी की और जनता ने उन्हें एक बार फिर भारी जनसमर्थन देकर विधानसभा पहुंचा दिया।

छोटे सरकार पर जनता का भरोसा बरकरार

मोकामा की राजनीति हमेशा सियासी गर्माहट और बाहुबली प्रभाव के लिए जानी जाती रही है, लेकिन इस बार की जीत ने यह साबित कर दिया कि तमाम विवादों, गिरफ्तारी और विरोधों के बावजूद अनंत सिंह का जनाधार कमजोर नहीं पड़ा है। जेल में रहते हुए भी इतनी बड़ी जीत हासिल करना इस बात का संकेत है कि मोकामा में लोगों का विश्वास अब भी उनके नाम के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है। यह चुनाव सिर्फ एक परिणाम नहीं बल्कि मोकामा की बदलती सियासी कहानी का एक बड़ा अध्याय है, जिसमें अनंत सिंह का प्रभाव लगातार कायम दिखाई देता है।

Team The Loktantra

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