द लोकतंत्र/ लखनऊ : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश स्थित संसदीय क्षेत्र रायबरेली दौरे के दौरान एक भावनात्मक पल उस वक्त राजनीतिक विवाद में बदल गया, जब उन्हें उनके दादा फिरोज गांधी का बताया जा रहा एक पुराना ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा गया। इस घटनाक्रम के सामने आते ही उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने इस दस्तावेज की वैधता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग कर दी है।
राहुल गांधी को विकास सिंह नामक व्यक्ति ने सौंपा था ड्राइविंग लाइसेंस
राहुल गांधी अपने दो दिवसीय रायबरेली दौरे पर थे। दौरे के दूसरे दिन रायबरेली प्रीमियर लीग से जुड़े विकास सिंह नाम के व्यक्ति ने सार्वजनिक मंच पर यह ड्राइविंग लाइसेंस राहुल गांधी को सौंपा। विकास सिंह का दावा है कि यह लाइसेंस कई दशक पहले एक कार्यक्रम के दौरान उनके ससुर को अचानक मिला था।
इसके बाद उनके ससुर और फिर सास ने इस दस्तावेज को सुरक्षित संभालकर रखा और अब इसे गांधी परिवार तक लौटाने का निर्णय लिया गया। मंच पर लाइसेंस मिलते ही राहुल गांधी भावुक नजर आए और उन्होंने तुरंत अपनी मां सोनिया गांधी को इसकी तस्वीर भेजी।
सीएम योगी के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने दस्तावेज की वैधता पर उठाया सवाल
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी उतनी ही तेज रही। राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने इस दस्तावेज के सार्वजनिक रूप से सामने आने पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस जैसे निजी दस्तावेज का वर्षों तक किसी तीसरे व्यक्ति के पास रहना संदेह पैदा करता है। मंत्री ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह लाइसेंस वास्तविक है या नहीं और यह भी जांच का विषय है कि आखिर यह दस्तावेज संबंधित व्यक्ति के परिवार के बजाय किसी अन्य के पास कैसे पहुंचा।
दिनेश प्रताप सिंह ने यह भी कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति होती है, जो सामान्यतः उसके परिजनों या कानूनी वारिसों के पास होनी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं यह पूरा मामला राहुल गांधी की रायबरेली यात्रा को चर्चा में लाने या भावनात्मक माहौल बनाने की कोशिश तो नहीं है। मंत्री ने मांग की कि प्रशासन इस बात की जांच करे कि लाइसेंस किस परिस्थिति में मिला, इतने वर्षों तक क्यों लौटाया नहीं गया और क्या यह दस्तावेज विधिक रूप से मान्य है।
दिनेश प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा
इस मुद्दे को लेकर दिनेश प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह मामला रायबरेली की जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए उछाला गया है। उन्होंने यह भी पूछा कि अगर यह लाइसेंस किसी परिवार के पास था तो दशकों तक इसे गांधी परिवार को लौटाने की पहल क्यों नहीं की गई।
बताया जा रहा है कि राहुल गांधी को सौंपा गया ड्राइविंग लाइसेंस वर्ष 1938 का है, यानी आज से करीब 88 साल पुराना। अब यह मामला भावनात्मक स्मृति से आगे बढ़कर राजनीतिक और कानूनी बहस का रूप ले चुका है। सबकी नजर इस पर टिकी है कि राज्य सरकार की ओर से जांच की मांग पर आगे क्या कदम उठाया जाता है और क्या इस ऐतिहासिक दस्तावेज की प्रामाणिकता को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने आती है।

