द लोकतंत्र/ पटना : बिहार में नई एनडीए सरकार के शपथ लेने के एक दिन बाद ही शुक्रवार (21 नवंबर 2025) को मंत्रियों के बीच विभागों का आधिकारिक बंटवारा कर दिया गया। जैसे ही शाम को विभागों की सूची जारी हुई, बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई। इसका सबसे बड़ा कारण रहा- गृह विभाग का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हटकर BJP नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को दिया जाना। पिछले दो दशकों से गृह मंत्रालय नीतीश कुमार के पास ही रहा है, ऐसे में इस बदलाव ने राजनीतिक गलियारों में नई बहसें छेड़ दी हैं।
गृह विभाग का बीजेपी के पास जाने का मतलब बिहार सरकार बीजेपी के इशारे पर चलेगी
विभागों के आवंटन के तुरंत बाद विपक्षी दल आरजेडी ने नीतीश सरकार पर हमला तेज कर दिया। आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने एक बयान जारी कर कहा कि गृह विभाग का बीजेपी के पास जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब बिहार सरकार नीतीश कुमार नहीं, बल्कि बीजेपी के इशारे पर चलेगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पहले ही सियासी ‘चक्रव्यूह’ रच लिया था जिसके चलते जेडीयू की भूमिका सीमित होती जा रही है। एजाज अहमद ने कहा, हम पहले से कह रहे थे कि इस सरकार में नीतीश कुमार सिर्फ चेहरा हैं। असल खेल बीजेपी का है। आज गृह विभाग सम्राट चौधरी को मिलने से साफ हो गया है कि बिहार की पूरी राजनीति अब बीजेपी नियंत्रित करेगी।
आरजेडी ने आगे कहा कि पिछले 20 वर्षों में गृह विभाग नीतीश कुमार के अधीन रहा और वे इसे अपनी सरकार की रीढ़ मानते थे। ऐसे में बीजेपी द्वारा यह विभाग अपने हाथ में लेना नीतीश कुमार की राजनीतिक स्थिति को कमजोर करने की रणनीति है। एजाज अहमद के अनुसार, अब बिहार में सरकार बीजेपी की नीति, विचार और नेतृत्व के आधार पर चलेगी। नीतीश कुमार की राजनीति पूरी तरह बीजेपी के इर्द-गिर्द आ गई है।
अब सरकार नीतीश नहीं, BJP चलाएगी
ज्ञात हो कि नई एनडीए सरकार में नीतीश कुमार के साथ कुल 26 मंत्रियों ने शपथ ली है। इनमें से 14 बीजेपी के, 8 जेडीयू (जिसमें नीतीश कुमार शामिल नहीं), 2 लोजपा (रामविलास) और 1-1 मंत्री HAM तथा RLएम से शामिल किए गए हैं। फिलहाल कई मंत्रियों को एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आगामी कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों का भार विभाजित किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गृह विभाग जैसे संवेदनशील मंत्रालय का किसी सहयोगी दल को सौंपना NDA के भीतर नए समीकरणों को दर्शाता है। सम्राट चौधरी, जो बिहार बीजेपी के प्रमुख चेहरे बनकर उभरे हैं, उन्हें यह विभाग मिलना बीजेपी की बढ़ती भूमिका का संकेत माना जा रहा है।
दूसरी ओर, जेडीयू ने इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पार्टी के भीतर भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज है। राजनीति के जानकार इसे नीतीश कुमार की स्थिति के लिए ‘टेस्टिंग फेज’ बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे एक बड़े सियासी बदलाव का प्रारंभ मान रहा है। विभागों के बंटवारे के साथ ही बिहार में नई सरकार की दिशा और भविष्य की राजनीति को लेकर सियासी गर्मी बढ़ गई है। आने वाले दिनों में एनडीए की आंतरिक गतिशीलता और विपक्ष की रणनीति पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

