द लोकतंत्र/महाराष्ट्र : शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के राज्यसभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने महाराष्ट्र की नगर निकाय राजनीति में सामने आए नए समीकरणों को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। स्थानीय निकाय चुनावों के बाद अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस और अकोट नगर परिषद में AIMIM के साथ बीजेपी के गठबंधन को लेकर राउत ने इसे पार्टी की “डबल स्टैंडर्ड” राजनीति करार दिया है। बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि एक ओर बीजेपी ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा देती है और दूसरी ओर सत्ता हासिल करने के लिए उसी कांग्रेस से हाथ मिला लेती है।
‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे पर सवाल
संजय राउत ने कहा कि Bharatiya Janata Party की राजनीति अवसरवादी होती जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नारा कांग्रेस मुक्त भारत है, तो फिर अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस के साथ गठबंधन क्यों किया गया। राउत के मुताबिक, बीजेपी को बहुमत हासिल करने के लिए यह कदम उठाना पड़ा, क्योंकि 60 सदस्यीय सदन में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। शिवसेना को 27 सीटें मिलीं, जो बहुमत से सिर्फ चार कम थीं, जबकि बीजेपी को 14 और कांग्रेस को 12 सीटें मिलीं।
राउत ने कहा कि बीजेपी को अपने नारों और व्यवहार में सामंजस्य रखना चाहिए। ऐसी पार्टी पर भरोसा नहीं किया जा सकता, जो सत्ता के लिए अपने ही सिद्धांतों से समझौता कर ले, उन्होंने कहा।
अजित पवार और सावरकर की विचारधारा का मुद्दा
बीजेपी द्वारा Ajit Pawar की एनसीपी के साथ गठबंधन पर भी संजय राउत ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अजित पवार Veer Savarkar की विचारधारा में विश्वास नहीं रखते, लेकिन बीजेपी उन्हीं के साथ सत्ता साझा कर रही है और शिवसेना को सावरकर पर ज्ञान दे रही है। राउत ने तंज कसते हुए कहा कि अगर बीजेपी को सावरकर से इतना ही प्रेम है, तो उसे अजित पवार को गठबंधन से बाहर कर देना चाहिए।
अकोट में AIMIM के साथ गठबंधन पर भी घेरा
सिर्फ अंबरनाथ ही नहीं, बल्कि अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में AIMIM के साथ बीजेपी के गठबंधन को लेकर भी राउत ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बीजेपी का यह कदम उसकी कथनी और करनी के बीच अंतर को उजागर करता है। इस पूरे घटनाक्रम पर शिवसेना (UBT) की सांसद Priyanka Chaturvedi ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा कि अब किसी भी पार्टी के समर्थक को नैतिकता की बात करने से पहले खुद पर नजर डालनी चाहिए, क्योंकि महाराष्ट्र की राजनीति “लेवल प्रो मैक्स” हो चुकी है।
महाराष्ट्र की राजनीति में बदले समीकरण
अंबरनाथ और अकोट में बने ये नए गठबंधन महाराष्ट्र की नगर निकाय राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माने जा रहे हैं। बीजेपी ने जहां सत्ता में बने रहने के लिए कांग्रेस, AIMIM और अजित पवार की एनसीपी के साथ समझौता किया, वहीं शिवसेना (UBT) इसे जनता के जनादेश के साथ खिलवाड़ बता रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में इन गठबंधनों का असर राज्य की बड़ी राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।
कुल मिलाकर, संजय राउत के तीखे हमले ने महाराष्ट्र की राजनीति में वैचारिक बनाम व्यावहारिक राजनीति की बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है, जिसमें बीजेपी के कदमों पर सवालों की बौछार हो रही है।

