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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के लखनऊ आह्वान पर यूपी में सियासी हलचल, केशव प्रसाद मौर्य का बयान बना चर्चा का केंद्र

Shankaracharya Avimukteshwarananda's Lucknow call sparks political turmoil in Uttar Pradesh, Keshav Prasad Maurya's statement becomes the center of discussion

द लोकतंत्र/ लखनऊ : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के 7 मार्च लखनऊ आगमन के ऐलान के बाद यूपी की राजनीति गरमा गई है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने स्वागत की बात कही, जबकि सीएम योगी आदित्यनाथ पर चल रहे विवाद के बीच सियासी समीकरण बदलते दिख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक और सियासी विमर्श साथ-साथ चलते दिखाई दे रहे हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के 7 मार्च को लखनऊ कूच के ऐलान के बाद प्रदेश में बयानबाजी तेज हो गई है। इसी क्रम में प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने वाराणसी दौरे के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि यदि जगतगुरु शंकराचार्य लखनऊ आते हैं तो एक राम भक्त होने के नाते उनका स्वागत करेंगे।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब शंकराचार्य लगातार प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मौर्य का यह रुख सत्ता के भीतर अलग स्वर का संकेत देता है। गौ-रक्षा के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में किसी गौ-तस्कर की हिम्मत नहीं कि वह गाय को हाथ भी लगा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गौ-माता को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने की आवश्यकता नहीं है।

मौर्य का रुख और योगी से अलग संदेश?

माघ मेले में स्नान को लेकर जनवरी में उपजे विवाद के बाद से ही डिप्टी सीएम के बयान शंकराचार्य के पक्ष में नरम दिखाई देते रहे हैं। अनशन के दौरान भी उन्होंने निवेदन करते हुए स्नान करने की अपील की थी। अब लखनऊ आगमन से पहले स्वागत की बात कहना राजनीतिक हलकों में अलग संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

जहां एक ओर शंकराचार्य मुख्यमंत्री योगी पर सीधे हमलावर रहे हैं, वहीं मौर्य का यह रुख सत्ता संतुलन की चर्चाओं को हवा दे रहा है। इससे पहले भी भाजपा के भीतर नेतृत्व और संतुलन को लेकर चर्चाएं समय-समय पर उठती रही हैं, और यह बयान उसी बहस को नया आयाम देता दिख रहा है।

अखिलेश यादव पर तीखा हमला, बढ़ी सियासी तल्खी

डिप्टी सीएम ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव शंकराचार्य के समर्थन के बहाने हिंदू वोटों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। मौर्य ने उन्हें ‘ढोंगी’ बताते हुए कहा कि वह राम, कृष्ण और शिव भक्तों के प्रति सम्मान की बात करते हैं, लेकिन व्यवहार में तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं।

शंकराचार्य के लखनऊ आगमन की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, यूपी की सियासत में बयानबाजी और तेज होती जा रही है। एक ओर धार्मिक नेतृत्व की सक्रियता है, तो दूसरी ओर सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक समीकरणों की नई बिसात बिछती नजर आ रही है। आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि शंकराचार्य के कार्यक्रम और उस पर सत्ता पक्ष की रणनीति यूपी की राजनीति को किस दिशा में ले जाती है।

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Team The Loktantra

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