द लोकतंत्र : हिंदू धर्म शास्त्रों में समय को शुभ और अशुभ कालखंडों में विभाजित किया गया है। जहाँ राहुकाल, यमघण्ट काल और भद्रा को अशुभ माना जाता है, वहीं प्रदोष काल, गुरु पुष्य काल और अमृत सिद्धि काल शुभ माने जाते हैं। इन सबमें अभिजीत मुहूर्त का सर्वोच्च महत्व है। इसी विशिष्टता के चलते, मंगलवार, 25 नवंबर को विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर अयोध्या राम मंदिर के ध्वजारोहण के लिए भी इसी अभिजीत मुहूर्त को चुना गया है। राम मंदिर से जुड़ा हर बड़ा और निर्णायक आयोजन—चाहे वह भूमि पूजन हो या रामलला की प्राण प्रतिष्ठा—इसी मुहूर्त में संपन्न किया गया है।
क्या है अभिजीत मुहूर्त और इसका समय?
अभिजीत मुहूर्त का शाब्दिक अर्थ ही ‘विजय’ होता है, जिसका सीधा तात्पर्य है सफलता दिलाने वाला समय।
- कालखंड: यह मुहूर्त दिन के मध्य भाग में, लगभग 12 बजे के आसपास आता है और इसकी अवधि लगभग 48 मिनट की होती है।
- गणितीय गणना: अभिजीत मुहूर्त का समय प्रतिदिन सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के आधार पर बदलता रहता है।
- आज का मुहूर्त: मंगलवार, 25 नवंबर 2025 को राम मंदिर ध्वजारोहण के लिए यह अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक मान्य है।
पौराणिक और धार्मिक महत्व
अभिजीत मुहूर्त को सर्वश्रेष्ठ माने जाने के पीछे दो प्रमुख पौराणिक मान्यताएँ हैं, जो इसकी विजय दिलाने वाली शक्ति को स्थापित करती हैं।
- श्रीराम का जन्म: धर्म शास्त्रों के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर ठीक 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। भगवान विष्णु के अवतार का जन्म इस कालखंड में होना, इसे अत्यंत पवित्र और शुभ बना देता है।
- त्रिपुरासुर वध: एक अन्य महत्वपूर्ण पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध भी अभिजीत मुहूर्त में ही किया था। इस मुहूर्त में किया गया यह महा-विजयी कार्य, इस कालखंड को सभी प्रकार के दोषों का निवारण करने की शक्ति प्रदान करता है।
अभिजीत मुहूर्त का व्यावहारिक उपयोग
इस मुहूर्त की शक्ति इतनी अधिक मानी जाती है कि इसे सभी दोषों का निवारण करने वाला माना गया है।
- दोष निवारण: धार्मिक मान्यता है कि यह मुहूर्त सभी अशुभ योगों और दोषों को दूर करने की शक्ति रखता है।
- शुभ कार्यों हेतु उपयुक्त: यह मुहूर्त विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार का उद्घाटन और किसी भी नए कार्य की शुरुआत जैसे शुभ कार्यों के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। यदि किसी कार्य के लिए कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में वह कार्य निर्विघ्न रूप से संपन्न किया जा सकता है।
- वर्जित दिन: हालाँकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि बुधवार को अभिजीत मुहूर्त में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।
अयोध्या राम मंदिर के लिए इस मुहूर्त का चयन, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मंदिर निर्माण के सभी अनुष्ठान विजय और सफलता के संकल्प के साथ किए गए हैं।

