द लोकतंत्र : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर और देश-दुनिया में अपने दिव्य दरबार के लिए मशहूर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। बाबा बागेश्वर अब पूरे एक महीने के लिए ‘एकांतवास’ में जा रहे हैं। इस दौरान वे न तो कथा करेंगे, न ही किसी का पर्चा निकालेंगे।
6 मार्च 2026 की ताजा जानकारी के मुताबिक, धीरेंद्र शास्त्री ने खुद इस बात का ऐलान किया है कि वे ईश्वर की भक्ति और अपनी आंतरिक शक्ति को बढ़ाने के लिए एक कठिन साधना का रास्ता चुनने जा रहे हैं।
कहां जा रहे हैं धीरेंद्र शास्त्री?
खबरों की मानें तो धीरेंद्र शास्त्री मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित अपने धाम से दूर, देवभूमि उत्तराखंड की वादियों में जा रहे हैं। वे बद्रीनाथ धाम की बर्फीली पहाड़ियों के बीच एक महीने तक दिव्य साधना करेंगे। इस दौरान वे किसी भी तरह के नेटवर्क, टीवी, मोबाइल या सोशल मीडिया के संपर्क में नहीं रहेंगे। यहाँ तक कि वे इस एक महीने में किसी को इंटरव्यू भी नहीं देंगे।
गुरु की आज्ञा और खुद को साधने की कोशिश
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान अपनी इस गुप्त साधना की जानकारी देते हुए बागेश्वर बाबा ने कहा, “हमें एक महीने के लिए गुरु आज्ञा मिली है, इसलिए हम तप के लिए बद्रीनाथ जा रहे हैं। जिस मोड़ पर आज हम खड़े हैं, वहां खुद को साधना बहुत जरूरी है। दुनिया में बहकाने वाले बहुत आते हैं, इसलिए खुद का तप ही काम आता है।”
उन्होंने आगे बताया कि वे मई के महीने में इस साधना के लिए रवाना होंगे और सब कुछ त्याग कर केवल ईश्वर की भक्ति में लीन रहेंगे।
नई ऊर्जा के साथ होगी वापसी
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने भक्तों को भरोसा दिलाया है कि यह ब्रेक केवल खुद को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत करने के लिए है। उन्होंने कहा, “वहां से वापस लौटने के बाद हम नई ऊर्जा, नए विचारों और नई तैयारी के साथ आएंगे। समाज के लिए कुछ नया करने के मकसद से हम नए तरीके से वापस लौटेंगे।”
भक्तों को करना होगा इंतजार
इस घोषणा के बाद बागेश्वर धाम जाने वाले लाखों भक्तों को अब मई के महीने में बाबा के दर्शन नहीं हो पाएंगे। इस दौरान न तो कोई कथा होगी और न ही दिव्य दरबार लगेगा। धाम से जुड़े लोगों का कहना है कि बाबा की यह साधना सनातन धर्म के प्रचार और लोक कल्याण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह कदम दिखाता है कि लोकप्रियता के शिखर पर होने के बावजूद, आध्यात्मिक उन्नति के लिए शांति और एकांत कितना जरूरी है। अब भक्तों को इंतजार है उनकी इस साधना के पूरा होने और उनके वापस लौटने का।

