7 मार्च 2026 की इस विशेष रिपोर्ट में आइए जानते हैं कि इस महीने का धार्मिक महत्व क्या है और आयुर्वेद के नजरिए से हमें अपनी लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए।
19 मार्च से ही क्यों शुरू होगा नया साल?
चैत्र का महीना तो 4 मार्च से लग गया है, लेकिन हिंदू नववर्ष (Vikram Samvat) 15 दिन बाद यानी 19 मार्च से शुरू होगा। इसके पीछे एक गहरा अर्थ है। दरअसल, महीने के शुरुआती 15 दिन ‘अंधेरे’ (अमावस्या) की ओर बढ़ते हैं। सनातन धर्म ‘तमसो मां ज्योतिर्गमय’ (अंधेरे से उजाले की ओर) में विश्वास रखता है, इसलिए जब अमावस्या के बाद चंद्रमा बढ़ने लगता है (शुक्ल पक्ष), तभी से नए साल की शुरुआत मानी जाती है।
आयुर्वेद और चैत्र: खान-पान का रखें खास ख्याल
ऋतु परिवर्तन के कारण इस महीने में हमारा पाचन तंत्र (Digestion) थोड़ा कमजोर हो जाता है। इसलिए आयुर्वेद और पुराणों में कुछ कड़े नियम बताए गए हैं:
दूध और गुड़ से दूरी: इस महीने में दूध का सेवन कम करना चाहिए, इसकी जगह दही और मिश्री लेना फायदेमंद है। साथ ही गुड़ खाने की भी मनाही है।
नीम के पत्ते: चैत्र में खाली पेट नीम के पत्ते खाने से साल भर बीमारियां दूर रहती हैं और खून साफ होता है।
नमक का त्याग: कोशिश करें कि इस महीने कम से कम 15 दिन नमक न खाएं। यदि जरूरी हो तो केवल ‘सेंधा नमक’ का ही इस्तेमाल करें।
एक समय भोजन: महाभारत के अनुसार, चैत्र में दिन में केवल एक बार भोजन करना उम्र और सेहत के लिए बहुत अच्छा माना गया है।
धार्मिक महत्व: ब्रह्मा जी और मत्स्य अवतार
ब्रह्म और नारद पुराण बताते हैं कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मा जी ने इस ब्रह्मांड को बनाया था। इसी दिन सतयुग की शुरुआत हुई थी, इसलिए इसे ‘युगादि’ भी कहा जाता है। प्रलय के समय जब पूरी धरती जलमग्न थी, तब भगवान विष्णु ने मछली (मत्स्य) का रूप धरकर मनु की नाव को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया था, जिससे नई सृष्टि मुमकिन हो पाई।
चैत्र मास के मुख्य व्रत-त्योहार 2026
11 मार्च: शीतला अष्टमी (बासोड़ा)
15 मार्च: पापमोचिनी एकादशी
18 मार्च: चैत्र अमावस्या
19 मार्च: हिंदू नववर्ष प्रारंभ, चैत्र नवरात्रि शुरू, गुड़ी पड़वा, उगादी
26 मार्च: राम नवमी (नवरात्रि का अंतिम दिन)
31 मार्च: महावीर जयंती
2 अप्रैल: हनुमान जयंती, चैत्र पूर्णिमा (महीने का समापन)
निष्कर्ष: चैत्र का महीना हमें अनुशासन और भक्ति के साथ प्रकृति से जुड़ने का संदेश देता है। सूर्योदय से पहले उठना, सूर्य को अर्घ्य देना और हल्का भोजन करना न केवल आपको मानसिक शांति देगा, बल्कि बढ़ती गर्मी में बीमारियों से भी बचाएगा।
द लोकतंत्र : हिंदू पंचांग का पहला महीना यानी चैत्र मास 4 मार्च से शुरू हो चुका है। यह महीना भारतीय संस्कृति में बेहद खास माना जाता है क्योंकि इसी महीने से वसंत ऋतु की शुरुआत होती है और प्रकृति नई ऊर्जा से भर जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी महीने में ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी और भगवान विष्णु ने अपना पहला ‘मत्स्य अवतार’ लिया था।
7 मार्च 2026 की इस विशेष रिपोर्ट में आइए जानते हैं कि इस महीने का धार्मिक महत्व क्या है और आयुर्वेद के नजरिए से हमें अपनी लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए।
19 मार्च से ही क्यों शुरू होगा नया साल?
चैत्र का महीना तो 4 मार्च से लग गया है, लेकिन हिंदू नववर्ष (Vikram Samvat) 15 दिन बाद यानी 19 मार्च से शुरू होगा। इसके पीछे एक गहरा अर्थ है। दरअसल, महीने के शुरुआती 15 दिन ‘अंधेरे’ (अमावस्या) की ओर बढ़ते हैं। सनातन धर्म ‘तमसो मां ज्योतिर्गमय’ (अंधेरे से उजाले की ओर) में विश्वास रखता है, इसलिए जब अमावस्या के बाद चंद्रमा बढ़ने लगता है (शुक्ल पक्ष), तभी से नए साल की शुरुआत मानी जाती है।
आयुर्वेद और चैत्र: खान-पान का रखें खास ख्याल
ऋतु परिवर्तन के कारण इस महीने में हमारा पाचन तंत्र (Digestion) थोड़ा कमजोर हो जाता है। इसलिए आयुर्वेद और पुराणों में कुछ कड़े नियम बताए गए हैं:
- दूध और गुड़ से दूरी: इस महीने में दूध का सेवन कम करना चाहिए, इसकी जगह दही और मिश्री लेना फायदेमंद है। साथ ही गुड़ खाने की भी मनाही है।
- नीम के पत्ते: चैत्र में खाली पेट नीम के पत्ते खाने से साल भर बीमारियां दूर रहती हैं और खून साफ होता है।
- नमक का त्याग: कोशिश करें कि इस महीने कम से कम 15 दिन नमक न खाएं। यदि जरूरी हो तो केवल ‘सेंधा नमक’ का ही इस्तेमाल करें।
- एक समय भोजन: महाभारत के अनुसार, चैत्र में दिन में केवल एक बार भोजन करना उम्र और सेहत के लिए बहुत अच्छा माना गया है।
धार्मिक महत्व: ब्रह्मा जी और मत्स्य अवतार
ब्रह्म और नारद पुराण बताते हैं कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मा जी ने इस ब्रह्मांड को बनाया था। इसी दिन सतयुग की शुरुआत हुई थी, इसलिए इसे ‘युगादि’ भी कहा जाता है। प्रलय के समय जब पूरी धरती जलमग्न थी, तब भगवान विष्णु ने मछली (मत्स्य) का रूप धरकर मनु की नाव को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया था, जिससे नई सृष्टि मुमकिन हो पाई।
चैत्र मास के मुख्य व्रत-त्योहार 2026
- 11 मार्च: शीतला अष्टमी (बासोड़ा)
- 15 मार्च: पापमोचिनी एकादशी
- 18 मार्च: चैत्र अमावस्या
- 19 मार्च: हिंदू नववर्ष प्रारंभ, चैत्र नवरात्रि शुरू, गुड़ी पड़वा, उगादी
- 26 मार्च: राम नवमी (नवरात्रि का अंतिम दिन)
- 31 मार्च: महावीर जयंती
- 2 अप्रैल: हनुमान जयंती, चैत्र पूर्णिमा (महीने का समापन)
निष्कर्ष: चैत्र का महीना हमें अनुशासन और भक्ति के साथ प्रकृति से जुड़ने का संदेश देता है। सूर्योदय से पहले उठना, सूर्य को अर्घ्य देना और हल्का भोजन करना न केवल आपको मानसिक शांति देगा, बल्कि बढ़ती गर्मी में बीमारियों से भी बचाएगा।
द लोकतंत्र : हिंदू पंचांग का पहला महीना यानी चैत्र मास 4 मार्च से शुरू हो चुका है। यह महीना भारतीय संस्कृति में बेहद खास माना जाता है क्योंकि इसी महीने से वसंत ऋतु की शुरुआत होती है और प्रकृति नई ऊर्जा से भर जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी महीने में ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी और भगवान विष्णु ने अपना पहला ‘मत्स्य अवतार’ लिया था।
7 मार्च 2026 की इस विशेष रिपोर्ट में आइए जानते हैं कि इस महीने का धार्मिक महत्व क्या है और आयुर्वेद के नजरिए से हमें अपनी लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए।
19 मार्च से ही क्यों शुरू होगा नया साल?
चैत्र का महीना तो 4 मार्च से लग गया है, लेकिन हिंदू नववर्ष (Vikram Samvat) 15 दिन बाद यानी 19 मार्च से शुरू होगा। इसके पीछे एक गहरा अर्थ है। दरअसल, महीने के शुरुआती 15 दिन ‘अंधेरे’ (अमावस्या) की ओर बढ़ते हैं। सनातन धर्म ‘तमसो मां ज्योतिर्गमय’ (अंधेरे से उजाले की ओर) में विश्वास रखता है, इसलिए जब अमावस्या के बाद चंद्रमा बढ़ने लगता है (शुक्ल पक्ष), तभी से नए साल की शुरुआत मानी जाती है।
आयुर्वेद और चैत्र: खान-पान का रखें खास ख्याल
ऋतु परिवर्तन के कारण इस महीने में हमारा पाचन तंत्र (Digestion) थोड़ा कमजोर हो जाता है। इसलिए आयुर्वेद और पुराणों में कुछ कड़े नियम बताए गए हैं:
- दूध और गुड़ से दूरी: इस महीने में दूध का सेवन कम करना चाहिए, इसकी जगह दही और मिश्री लेना फायदेमंद है। साथ ही गुड़ खाने की भी मनाही है।
- नीम के पत्ते: चैत्र में खाली पेट नीम के पत्ते खाने से साल भर बीमारियां दूर रहती हैं और खून साफ होता है।
- नमक का त्याग: कोशिश करें कि इस महीने कम से कम 15 दिन नमक न खाएं। यदि जरूरी हो तो केवल ‘सेंधा नमक’ का ही इस्तेमाल करें।
- एक समय भोजन: महाभारत के अनुसार, चैत्र में दिन में केवल एक बार भोजन करना उम्र और सेहत के लिए बहुत अच्छा माना गया है।
धार्मिक महत्व: ब्रह्मा जी और मत्स्य अवतार
ब्रह्म और नारद पुराण बताते हैं कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मा जी ने इस ब्रह्मांड को बनाया था। इसी दिन सतयुग की शुरुआत हुई थी, इसलिए इसे ‘युगादि’ भी कहा जाता है। प्रलय के समय जब पूरी धरती जलमग्न थी, तब भगवान विष्णु ने मछली (मत्स्य) का रूप धरकर मनु की नाव को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया था, जिससे नई सृष्टि मुमकिन हो पाई।
चैत्र मास के मुख्य व्रत-त्योहार 2026
- 11 मार्च: शीतला अष्टमी (बासोड़ा)
- 15 मार्च: पापमोचिनी एकादशी
- 18 मार्च: चैत्र अमावस्या
- 19 मार्च: हिंदू नववर्ष प्रारंभ, चैत्र नवरात्रि शुरू, गुड़ी पड़वा, उगादी
- 26 मार्च: राम नवमी (नवरात्रि का अंतिम दिन)
- 31 मार्च: महावीर जयंती
- 2 अप्रैल: हनुमान जयंती, चैत्र पूर्णिमा (महीने का समापन)
चैत्र का महीना हमें अनुशासन और भक्ति के साथ प्रकृति से जुड़ने का संदेश देता है। सूर्योदय से पहले उठना, सूर्य को अर्घ्य देना और हल्का भोजन करना न केवल आपको मानसिक शांति देगा, बल्कि बढ़ती गर्मी में बीमारियों से भी बचाएगा।

