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क्रिसमस के पारंपरिक रंग: हरा, लाल और सफेद क्यों हैं इतने खास? जानें ‘Christmas Colors’ के पीछे छिपा आशा, प्रेम और पवित्रता का महत्व

The loktnatra

द लोकतंत्र : ईसाई समुदाय का प्रमुख त्योहार क्रिसमस हर साल 25 दिसंबर को दुनियाभर में उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार का एक अहम हिस्सा है रंग-बिरंगी सजावट और उपहारों का आदान-प्रदान। हालांकि क्रिसमस से कई रंग जुड़े हुए हैं, लेकिन हरा, लाल और सफेद को सबसे अधिक पारंपरिक रंग माना जाता है। ये रंग सिर्फ सजावट के लिए नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे गहरा इतिहास और आध्यात्मिक अर्थ छिपा है।

क्रिसमस और हरे रंग का अमर संबंध

क्रिसमस पर हरे रंग का पारंपरिक महत्व सीधे तौर पर सदाबहार पौधों (Evergreen Coniferous Tree) से जुड़ा है, जिन्हें हम क्रिसमस ट्री के रूप में सजाते हैं।

  • आशा और अनंत जीवन: सर्दियों के दौरान, जब अधिकांश पेड़-पौधे सूख जाते हैं, तब भी सदाबहार पेड़ हरे रहते हैं। यह इस बात का संकेत है कि मुश्किल समय या ‘आध्यात्मिक सर्दी’ में भी जीवन में आशा और उम्मीद बनी रहनी चाहिए।
  • रोमन परंपरा: मान्यता है कि वर्षों पहले कड़ाके की ठंड में रोमन लोग सौभाग्य के प्रतीक के रूप में सदाबहार शाखाएं एक-दूसरे को देते थे। ईसाई परंपरा में, हरा रंग अनंत जीवन, ईश्वरीय कृपा और पुनर्जन्म का भी प्रतीक है।

लाल रंग: सेंटा क्लॉज और बाइबिल की कहानी

क्रिसमस में लाल रंग की उपयोगिता परंपरागत रूप से बाइबिल की कहानियों और सेंटा क्लॉज से जुड़ी हुई है।

  • स्वर्ग का वृक्ष: मध्य युग के दौरान यूरोप में क्रिसमस की पूर्व संध्या पर ‘स्वर्ग कथाओं’ पर आधारित नाटक होते थे। इन नाटकों में ईडन गार्डन में ‘स्वर्ग का वृक्ष’ या चीड़ के पेड़ को लाल सेबों से बंधा दिखाया जाता था। लाल रंग के सेब (या होली बेरी) आसानी से उपलब्ध होते थे, इसलिए सजावट के तौर पर इनका उपयोग किया जाता था।
  • आध्यात्मिक अर्थ: ईसाई परंपरा में लाल रंग ईसा मसीह के बलिदान और रक्त का प्रतीक है, जो प्रेम और त्याग को दर्शाता है। इसके अलावा, सेंटा क्लॉज की परिधान (ड्रेस) भी लाल रंग की होती है, जिसने इस रंग की लोकप्रियता को वैश्विक स्तर पर बढ़ाया है।

सफेद रंग: पवित्रता और नव स्वागत का प्रतीक

सफेद रंग पश्चिमी संस्कृति में पवित्रता, शांति और आनंद का प्रतीक माना जाता है।

  • बर्फ और पवित्रता: सर्दियों में चारों ओर पड़ी बर्फ की सफेद चादर इस रंग के प्राकृतिक जुड़ाव को दर्शाती है। ईसाई परंपरा के अनुसार, यीशु के जन्म का स्वागत करने के लिए घरों को सफेद रंग से सजाया जाता था।
  • कैथोलिक प्रतीकवाद: 18वीं शताब्दी में पेड़ों को सजाने के लिए सफेद वेफर्स (wafers) का उपयोग किया जाता था। सफेद वेफर और लाल सेब क्रमशः ईसा मसीह के शरीर और रक्त के कैथोलिक प्रतीक थे। अधिकांश चर्चों में भी सजावट के लिए सफेद रंग का इस्तेमाल होता है, जो ईश्वरीय प्रकाश और शांति को दर्शाता है।

ये तीनों पारंपरिक रंग मिलकर क्रिसमस के उत्सव को न केवल दृश्य रूप से सुंदर बनाते हैं, बल्कि इस पर्व के गहन आध्यात्मिक अर्थ को भी प्रकट करते हैं।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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