द लोकतंत्र : दिल्ली का सरोजनी नगर मार्केट, जो अपने अति सस्ते और ट्रेंडी परिधानों के लिए देशभर के युवाओं के बीच लोकप्रिय है, आजकल एक विवादित चर्चा के केंद्र में है। जहाँ एक ओर खरीदार यहाँ ₹100 से ₹200 में कथित ब्रांडेड कपड़े पाकर प्रसन्न होते हैं, वहीं प्रसिद्ध कथावाचक शिवम साधक महाराज ने इन कपड़ों के स्रोत और उनसे जुड़ी ऊर्जा को लेकर एक चौंकाने वाला दावा किया है। उनके अनुसार, ये कपड़े न केवल शारीरिक व्याधियों का कारण बन सकते हैं, अपितु इनमें छिपी नकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति के भाग्य को भी प्रभावित कर सकती है।
सस्ते माल का व्यापारिक स्रोत: थोक बाजार की सच्चाई
सरोजनी नगर के दुकानदारों और क्षेत्रीय जानकारों के मुताबिक, इन कपड़ों की सप्लाई चेन काफी जटिल है।
- एक्सपोर्ट रिजेक्ट और सरप्लस: बाजार का एक बड़ा हिस्सा उन कपड़ों से भरा होता है जिन्हें बड़े ब्रांड्स स्टिचिंग, लेबलिंग या माइनर फिटिंग इश्यू के कारण रिजेक्ट कर देते हैं। फैक्ट्रियां इन्हें बल्क (थोक) में बेच देती हैं, जिन्हें दुकानदार सस्ती दरों पर खरीदते हैं।
- रघुबीर नगर कनेक्शन: पश्चिमी दिल्ली का रघुबीर नगर क्षेत्र इन थोक कपड़ों का मुख्य केंद्र है। सुबह 3 बजे से यहाँ बोली लगनी शुरू होती है, जहाँ गठरियों में भरे कपड़े बेचे जाते हैं।
आध्यात्मिक चेतावनी: मृत व्यक्तियों के कपड़े और नकारात्मक ऊर्जा
कथावाचक शिवम साधक महाराज ने इस विषय को एक अलग कोण प्रदान किया है। उनका तर्क है कि पश्चिमी देशों में उपयोग किए गए और फेंके गए कपड़े कंटेनरों के जरिए भारत आते हैं।
महाराज के दावों के मुख्य बिंदु:
- ऊर्जा का स्थानांतरण: उनका मानना है कि कपड़ों में पूर्व उपयोगकर्ता की अधूरी इच्छाएं और ऊर्जा रहन-सहन के दौरान प्रवेश कर जाती हैं।
- गंभीर जोखिम: ऐसी संभावना व्यक्त की गई है कि उनमें से कुछ कपड़े ऐसे व्यक्तियों के हो सकते हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी हो। ऐसे वस्त्र धारण करना आर्थिक संकट और मानसिक अशांति को आमंत्रण देना हो साकता है।
शुद्धिकरण की विधि और हाइजीन
यदि आप इन बाजारों से शॉपिंग करते हैं, तो शिवम साधक महाराज और स्वास्थ्य विशेषज्ञ दोनों ही सफाई पर जोर देते हैं।
- नमक वाले पानी का उपयोग: आध्यात्मिक शुद्धि के लिए कपड़ों को सीधे पहनने के बजाय नमक मिश्रित जल से धोने की सलाह दी गई है, ताकि नकारात्मक प्रभाव कम हो सके।
- हाइजीन चेक: थोक में रखे जाने के कारण ये कपड़े संक्रमण और त्वचा रोगों का कारण बन सकते हैं। अतः इन्हें अच्छी तरह डिसइंफेक्ट करना अनिवार्य है।
सरोजनी नगर जैसे बाजारों का अस्तित्व आर्थिक रूप से कमजोर और सचेत खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण है, किंतु उपभोक्ता जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। आने वाले समय में, सरकार और स्थानीय निकायों को इन ‘सेकेंड-हैंड’ कपड़ों की क्वालिटी और स्वच्छता मानकों पर नियम बनाने की आवश्यकता महसूस हो सकती है।
निष्कर्षतः, फैशन के साथ-साथ अपनी आध्यात्मिक और शारीरिक सुरक्षा का ध्यान रखना एक सचेत नागरिक की पहचान है।
डिस्क्लेमर: इस न्यूज में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। द लोकतंत्र इसकी पुष्टि नहीं करता है।

