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Ganesh Jayanti 2026: कल है गणेश जयंती, जानें गणेश चतुर्थी से यह कैसे है अलग और पूजा के जरूरी नियम

The loktnatra

द लोकतंत्र : हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से होती है। बप्पा के भक्तों के लिए साल में दो बड़े मौके आते हैं— एक ‘गणेश चतुर्थी’ और दूसरी ‘गणेश जयंती’। अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन पंचांग और मान्यताओं के हिसाब से ये दोनों अलग हैं।

कल यानी 22 जनवरी 2026 को ‘गणेश जयंती’ मनाई जाएगी। इसे ‘माघ विनायक चतुर्थी’ भी कहते हैं। आइए जानते हैं कि यह भाद्रपद वाली चतुर्थी से कैसे अलग है और कल पूजा करते समय आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

गणेश चतुर्थी और गणेश जयंती: क्या है अंतर?

दोनों ही दिन बप्पा को समर्पित हैं, लेकिन इनका महत्व अलग-अलग है:

  • गणेश जयंती (माघ मास): मान्यता है कि माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसलिए इसे बप्पा के ‘जन्मदिन’ के रूप में मनाया जाता है।
  • गणेश चतुर्थी (भाद्रपद मास): यह उत्सव अगस्त या सितंबर में आता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन गणेश जी कैलाश से धरती पर अपने भक्तों के बीच रहने आते हैं। इसे उनके ‘आगमन’ का उत्सव माना जाता है।

पूजा की सरल विधि और शुभ समय

गणेश जयंती पर बप्पा की कृपा पाने के लिए दोपहर का समय सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

  1. स्थापना: पूजा स्थल पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा रखें।
  2. श्रृंगार: भगवान को सिंदूर, अक्षत (चावल), गंध और धूप अर्पित करें। उन्हें लाल रंग के वस्त्र या कलावा चढ़ाना शुभ होता है।
  3. प्रिय भोग: बप्पा को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। साथ ही उन्हें ‘दूर्वा’ (हरी घास) चढ़ाना न भूलें, क्योंकि इसके बिना उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।
  4. मंत्र: पूजा के दौरान ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें।

सावधान: कल न करें चंद्र दर्शन

गणेश जयंती के दिन चंद्रमा को देखना वर्जित माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन चांद देखने से व्यक्ति पर ‘मिथ्या कलंक’ यानी झूठा आरोप लगने का खतरा रहता है। इसलिए कल रात के समय आसमान की तरफ देखने से बचें। अगर गलती से चांद दिख जाए, तो तुरंत बप्पा से माफी मांगें और उनकी आरती करें।

विसर्जन और व्रत के नियम

भाद्रपद वाली चतुर्थी पर लोग बप्पा को 10 दिनों तक घर में रखते हैं, लेकिन गणेश जयंती पर ज्यादातर लोग एक दिन का उपवास रखते हैं। शाम को पूजा और आरती के बाद व्रत का पारण किया जाता है। कुछ जगहों पर इस दिन छोटी प्रतिमा स्थापित कर अगले दिन विसर्जन करने की भी परंपरा है।

भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के देवता हैं। सच्चे मन से की गई उनकी पूजा आपके जीवन के सभी विघ्नों (बाधाओं) को दूर कर देगी।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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