द लोकतंत्र : ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार कल से नूतन वर्ष 2026 का शुभारंभ होने जा रहा है। वैदिक पंचांग के दृष्टिकोण से यह वर्ष अत्यंत शुभ संकेतों के साथ प्रारंभ हो रहा है। 1 जनवरी 2026, गुरुवार को पौष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पड़ रही है, जो प्रदोष व्रत और रोहिणी नक्षत्र के कारण धार्मिक महत्व को द्विगुणित करती है। ज्योतिषविदों के अनुसार, गुरुवार के दिन त्रयोदशी का होना ‘गुरु प्रदोष’ का निर्माण करता है, जो ज्ञान, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
मुहूर्त : अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त की प्रासंगिकता
किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए पंचांग में अभिजीत मुहूर्त को सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
- अभिजीत मुहूर्त: 1 जनवरी को दोपहर 12:09 बजे से 12:51 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। यह समय किसी भी व्यवसायिक सौदे या नूतन प्रोजेक्ट के शुभारंभ के लिए अचूक है।
- ब्रह्म मुहूर्त: आध्यात्मिक उन्नति चाहने वालों के लिए प्रातः 5:36 बजे से 6:24 बजे तक का समय साधना हेतु निर्धारित है। वर्ष के प्रथम दिन इस समय में ध्यान करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
प्रदोष व्रत: शिव उपासना का विशेष मुहूर्त
नए साल का प्रथम दिन भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर है।
- पूजा का समय: सायंकाल 5:35 बजे से रात 8:19 बजे तक प्रदोष काल की पूजा का शुभ समय है। मान्यता है कि इस दौरान शिव परिवार की आराधना करने से संपूर्ण वर्ष के कष्टों का निवारण होता है।
- रोहिणी नक्षत्र: रात्रि 10:45 बजे तक रोहिणी नक्षत्र की उपस्थिति मानसिक स्थिरता और सौंदर्य में वृद्धि का प्रतीक है, क्योंकि चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करेंगे।
सावधानी: राहुकाल और वर्जित समय
वैदिक शास्त्रों में राहुकाल को अशुभ माना गया है, जिसमें महत्वपूर्ण कार्यों को टालना चाहिए।
- 1 जनवरी को उत्तर भारत में दोपहर 1:49 बजे से 3:09 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस समय के दौरान किसी भी नया करार या मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। इसके स्थान पर लाभ और अमृत चौघड़िया (11:55 AM से 02:32 PM) का चयन करना श्रेयस्कर होगा
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि वर्ष 2026 का प्रारंभ गुरुवार और त्रयोदशी के संयोग से होना आर्थिक क्षेत्र में बौद्धिक क्रांति का संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ग्रह दशा शिक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत के लिए नए द्वार खोलेगी। प्रदोष व्रत से शुरुआत होने के कारण, यह वर्ष व्यक्तिगत स्तर पर धैर्य और संयम सीखने का भी होगा।
निष्कर्षतः, 1 जनवरी 2026 का दिन आध्यात्मिक और व्यावहारिक कार्यों के बीच संतुलन बनाने का है। राहुकाल को छोड़कर अभिजीत मुहूर्त में किया गया कोई भी संकल्प सफलता की उच्च संभावना रखता है। यह पंचांग हमें अनुशासित जीवन जीने का मार्ग दिखाता है।

