द लोकतंत्र : रंगों के त्योहार होली की तैयारियां शुरू होने से पहले ही हिंदू कैलेंडर में एक ऐसा समय आता है जब खुशियों और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इसे ‘होलाष्टक’ कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक के ये 8 दिन बेहद संवेदनशील और नकारात्मक ऊर्जा से भरे होते हैं।
अगर आप भी अगले कुछ दिनों में कोई बड़ा काम जैसे—नया घर खरीदना, शादी की बात पक्की करना या नया बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो रुक जाइए। साल 2026 में होलाष्टक कब से शुरू हो रहा है और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है, आइए विस्तार से जानते हैं।
होलाष्टक 2026: कब से कब तक?
पंचांग के मुताबिक, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू होता है और पूर्णिमा यानी होलिका दहन तक रहता है।
- शुरुआत: 24 फरवरी 2026 (मंगलवार)
- समाप्ति: 03 मार्च 2026 (पूर्णिमा तिथि)
- अवधि: पूरे 8 दिन
इन 8 दिनों को क्यों माना जाता है अशुभ?
इसके पीछे कई धार्मिक और ज्योतिषीय कारण छिपे हुए हैं:
- भक्त प्रह्लाद की यातनाएं: पौराणिक कथा कहती है कि राक्षस राज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को विष्णु भक्ति छोड़ने के लिए इन्हीं 8 दिनों में भयंकर कष्ट दिए थे। इसलिए इन दिनों को कष्ट और शोक का प्रतीक माना जाता है।
- ग्रहों का उग्र स्वभाव: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस समय चंद्रमा, सूर्य, शनि और मंगल जैसे बड़े ग्रह काफी उग्र (Aggressive) होते हैं। ऐसे में इंसान की बुद्धि भ्रमित हो सकती है और गलत फैसले लेने का डर रहता है।
- कामदेव का अंत: माना जाता है कि इसी अष्टमी को भगवान शिव ने क्रोध में आकर कामदेव को भस्म कर दिया था। संसार में फैली इस नकारात्मकता के कारण भी शुभ काम नहीं किए जाते।
भूलकर भी न करें ये काम
होलाष्टक के दौरान कुछ विशेष कार्यों की मनाही होती है:
- विवाह और सगाई: इस समय शादी के बंधन में बंधना वर्जित है।
- गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश या नए मकान का सौदा करना शुभ नहीं माना जाता।
- नया व्यापार: कोई नया काम या निवेश शुरू करने से बचें।
- संस्कार: मुंडन, जनेऊ या नामकरण जैसे 16 संस्कारों को इस समय टाल देना चाहिए।
नकारात्मकता से बचने के लिए क्या करें?
भले ही ये दिन शुभ कार्यों के लिए ठीक नहीं हैं, लेकिन दान-पुण्य और पूजा-पाठ के लिए यह समय बहुत ही फलदायी माना जाता है।
- विष्णु साधना: भगवान विष्णु और नरसिंह भगवान की पूजा करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें।
- दान का महत्व: गरीबों को अनाज, पुराने कपड़े या धन का दान करें। इससे ग्रहों का बुरा प्रभाव कम होता है।
होलाष्टक हमें संयम और भक्ति का संदेश देता है। इन 8 दिनों में बाहरी दुनिया के दिखावे और जश्न के बजाय अपनी आत्मा की शांति और ईश्वर की भक्ति पर ध्यान देना जीवन में सकारात्मकता लाता है।

