द लोकतंत्र : बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक ‘होली’ का त्योहार करीब है, लेकिन इस साल होलिका दहन की तारीख को लेकर लोगों के मन में काफी सवाल हैं। कोई 2 मार्च कह रहा है तो कोई 3 मार्च। इस कन्फ्यूजन की सबसे बड़ी वजह है इस साल पड़ने वाला भद्रा काल और साल का पहला चंद्र ग्रहण।
अगर आप भी असमंजस में हैं कि पूजा कब करनी है, तो यह रिपोर्ट आपके लिए है। ज्योतिषविदों ने ग्रह-नक्षत्रों की गणना के बाद होलिका दहन के लिए सबसे उत्तम दिन और समय चुन लिया है।
क्यों हो रही है तारीख को लेकर कन्फ्यूजन?
इस साल फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 05:56 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की शाम 05:08 बजे तक रहेगी।
- 2 मार्च की समस्या: इस दिन पूर्णिमा तो है, लेकिन साथ में ‘भद्रा’ का साया भी है। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा काल में होलिका दहन करना अशुभ माना जाता है।
- 3 मार्च की चुनौती: इस दिन पूर्णिमा उदयातिथि में है, लेकिन शाम को तिथि समाप्त हो रही है। साथ ही, इसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लग रहा है।
3 मार्च ही क्यों है सबसे सही दिन?
पंडितों और ज्योतिषियों के अनुसार, तमाम अड़चनों के बावजूद 3 मार्च 2026 का दिन ही होलिका दहन के लिए सबसे श्रेष्ठ है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:
- उदयातिथि का महत्व: हिंदू धर्म में उदयातिथि (जिस तिथि में सूर्योदय हो) को प्रधानता दी जाती है। 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि में ही सूर्योदय होगा।
- ग्रहण की समाप्ति: 3 मार्च को लगने वाला चंद्र ग्रहण शाम 06:46 बजे समाप्त हो जाएगा। ग्रहण खत्म होने के बाद शुद्धिकरण करके होलिका दहन किया जा सकता है।
होलिका दहन 2026: शुभ मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के मोक्ष (समाप्ति) के बाद ही शुभ कार्य किए जाते हैं। इसलिए 3 मार्च की शाम को चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद ही होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत होगा।
- होलिका दहन मुहूर्त: शाम 06:46 बजे से रात 08:00 बजे तक।
- रंगों वाली होली: 4 मार्च 2026, बुधवार।
भद्रा मुक्त पूजा का महत्व
होलिका दहन में भद्रा का त्याग करना अनिवार्य है। मान्यता है कि भद्रा काल में होलिका दहन करने से देश और समाज में अशांति फैलती है और व्यक्ति को कष्ट झेलने पड़ते हैं। चूंकि 3 मार्च को भद्रा का साया नहीं रहेगा, इसलिए ग्रहण के बाद का समय पूजा के लिए सबसे शुद्ध और फलदायी माना जा रहा है।
इस साल अपनी खुशियों और परंपराओं के बीच सावधानी का भी ध्यान रखें। 3 मार्च की शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद ही परिवार के साथ होलिका पूजन करें और अगले दिन 4 मार्च को उत्साह के साथ रंगों का त्योहार मनाएं।

