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Jaya Ekadashi 2026: कब है जया एकादशी? जानें शुभ मुहूर्त और वो 5 गलतियां जो व्रत का फल कर सकती हैं नष्ट

The loktnatra

द लोकतंत्र : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत ऊंचा स्थान है। हर महीने आने वाली दो एकादशियों में से माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘जया एकादशी’ कहा जाता है। मान्यता है कि यह व्रत इतना प्रभावशाली है कि इसे करने वाले व्यक्ति को मृत्यु के बाद पिशाच योनि (भूत-प्रेत की योनि) में नहीं भटकना पड़ता और उसे सीधे श्री हरि विष्णु के चरणों में स्थान मिलता है।

लेकिन, एकादशी का व्रत जितना फलदायी है, इसके नियम उतने ही कड़े हैं। पूजा में हुई एक छोटी सी चूक आपके पूरे व्रत के पुण्य को खत्म कर सकती है। आइए जानते हैं इस साल जया एकादशी कब है और इस दिन किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए।

जया एकादशी 2026 की सही तारीख और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस साल एकादशी तिथि को लेकर थोड़ा फेरबदल है:

  • तिथि शुरू: 28 जनवरी 2026 को शाम 04:35 बजे से।
  • तिथि समाप्त: 29 जनवरी 2026 को दोपहर 01:55 बजे तक।
  • उदया तिथि: शास्त्रों के अनुसार उदया तिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।

व्रत के दौरान इन 5 गलतियों से बचें

अगर आप जया एकादशी का पुण्य पाना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें:

1. चावल से दूरी: एकादशी के दिन चावल खाना सबसे बड़ा दोष माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन चावल का सेवन करने से अगला जन्म रेंगने वाले जीव के रूप में मिलता है। इसलिए खुद भी चावल न खाएं और घर में भी न बनाएं।

2. तामसिक भोजन का त्याग: यह व्रत पूरी तरह सात्विक होता है। इस दिन लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें। इससे न केवल व्रत टूटता है बल्कि घर में दरिद्रता भी आती है।

3. काले कपड़ों से परहेज: किसी भी शुभ कार्य या व्रत में काले रंग के कपड़े पहनना अच्छा नहीं माना जाता। एकादशी के दिन पीले या सफेद रंग के वस्त्र पहनना सबसे उत्तम है, क्योंकि पीला रंग भगवान विष्णु को अति प्रिय है।

4. तुलसी के पत्ते न तोड़ें: तुलसी माँ, भगवान विष्णु की सबसे बड़ी भक्त मानी जाती हैं और वे एकादशी के दिन निर्जला व्रत रखती हैं। इसलिए इस दिन तुलसी के पत्तों को तोड़ना उन्हें कष्ट देने जैसा है। पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

5. क्रोध और अपशब्द: एकादशी के दिन मन को शांत रखें। किसी से लड़ाई-झगड़ा न करें और न ही किसी का दिल दुखाएं। इस दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

क्यों खास है यह व्रत?

धार्मिक कथाओं के अनुसार, इंद्र की सभा में माल्यवान और पुष्पवती नाम के दो गंधर्वों को उनके प्रमाद के कारण पिशाच बनने का श्राप मिला था। उन्होंने अनजाने में जया एकादशी का व्रत किया, जिससे वे पिशाच योनि से मुक्त होकर अपने असली रूप में वापस आ गए। इसीलिए इसे मोक्ष और मुक्ति का व्रत माना जाता है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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