द लोकतंत्र : हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व शिव और शक्ति के मिलन का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और सच्चे मन से महादेव की आराधना करने से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और सुख-समृद्धि आती है।
साल 2026 में महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दिन पूजा का सबसे खास समय यानी ‘निशीथ काल’ रात 11:52 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी की रात 12:42 बजे तक रहेगा। हालांकि, शिवजी की पूजा जितनी सरल है, उसके नियम उतने ही सख्त हैं। अगर पूजा में कुछ गलतियाँ हो जाएं, तो उसका पूरा फल नहीं मिलता।
शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका
शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय दिशा का ज्ञान होना बहुत जरूरी है:
- सही दिशा: जल चढ़ाते समय हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़ा होना चाहिए। ऐसा करने से महादेव प्रसन्न होते हैं।
- धारा का ध्यान: जल इस तरह चढ़ाएं कि वह उत्तर दिशा की ओर से शिवलिंग पर गिरे।
- परिक्रमा: जल चढ़ाने के तुरंत बाद पूरी परिक्रमा न करें, क्योंकि शिवलिंग की जलधारी को लांघना अनुचित माना जाता है।
पूजा में इन चीजों से बचें (सावधानियां)
महाशिवरात्रि पर अपनी पूजा को सफल बनाने के लिए इन नियमों का पालन जरूर करें:
- बर्तन का चुनाव: शिवजी को दूध या जल चढ़ाने के लिए कांस्य (ब्रोंज) के बर्तन का इस्तेमाल न करें। इसकी जगह सोना, चांदी या तांबे के लोटे का प्रयोग करना शुभ होता है।
- कपड़ों का रंग: महादेव की पूजा में काले रंग के कपड़े पहनना वर्जित है। इस दिन पीले, सफेद, गुलाबी या संतरी जैसे हल्के और शुभ रंग पहनें।
- वर्जित चीजें: भगवान शिव को कभी भी तुलसी के पत्ते, तिल और नारियल पानी न चढ़ाएं। साथ ही, टूटे हुए चावल (अक्षत) अर्पित करना भी अशुभ माना जाता है।
- बिल्वपत्र का नियम: शिवजी को हमेशा ऐसे बेलपत्र चढ़ाएं जो कहीं से कटे-फटे न हों। तीनों पत्तों का पूरा होना अनिवार्य है।
- भोजन पर संयम: अगर आप व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तो भी इस दिन तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन) से दूर रहें। व्रत के दौरान सिर्फ फलों और दूध का सेवन करें।
मन की शुद्धता है सबसे जरूरी
शास्त्रों में कहा गया है कि बाहरी पूजा से कहीं ज्यादा जरूरी मन की शुद्धि है। महाशिवरात्रि के दिन अपने मन में किसी के प्रति गलत विचार न लाएं। क्रोध और असत्य से दूर रहकर ‘ओम नमः शिवाय’ का जाप करना सबसे उत्तम फल देता है।
महाशिवरात्रि का व्रत और पूजा हमें संयम और अनुशासन सिखाते हैं। अगर हम इन नियमों का ध्यान रखते हुए भोलेनाथ की भक्ति करेंगे, तो जीवन में सकारात्मकता और शांति का वास होगा।

