द लोकतंत्र : हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का अत्यंत विशेष स्थान है, जिसे पवित्र और कल्याणकारी माना जाता है। मार्गशीर्ष माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को मार्गशीर्ष पूर्णिमा कहा जाता है, जिसका आध्यात्मिक महत्व सर्वाधिक है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं (16 कला) से संपन्न होता है, जिससे इसकी ऊर्जा धरती पर चरम पर होती है। पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि 04 दिसंबर को सुबह 8 बजकर 37 मिनट से शुरू होकर 5 दिसंबर की सुबह 4 बजकर 43 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इसलिए, मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत और लक्ष्मी पूजन 04 दिसंबर 2025 को ही किया जाएगा।
पूजन और धार्मिक विधान
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा का विशेष विधान है।
- सत्यनारायण पूजा: इस शुभ तिथि पर भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा का आयोजन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह पूजा घर में सुख-शांति और समृद्धि लाती है।
- स्नान-दान की परंपरा: सदियों से चली आ रही मान्यता के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और पापों का नाश होता है। पुराणों में यह उल्लेख है कि पूर्णिमा के दिन किया गया दान अक्षय फल देता है।
राशिनुसार दान: सौभाग्य वृद्धि का अचूक उपाय
ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार, पूर्णिमा के दिन अपनी राशि के अनुकूल वस्तुओं का दान करने से ग्रहों का शुभ प्रभाव बढ़ता है और व्यक्तिगत जीवन में सुख-शांति आती है।
| राशि | दान की वस्तु | राशि | दान की वस्तु |
| मेष | लाल वस्त्र | तुला | चावल |
| वृषभ | सफेद रंग की चीजें | वृश्चिक | गुड़ |
| मिथुन | हरे रंग के वस्त्र | धनु | हल्दी |
| कर्क | गर्म कपड़े | मकर | काले तिल |
| सिंह | लाल चंदन | कुंभ | काली उड़द |
| कन्या | साबुत उड़द | मीन | आम |
दान का महत्व और निष्कर्ष
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर राशिनुसार दान करने का आधार यह है कि दान की गई वस्तु संबंधित ग्रह और तत्व से जुड़ी होती है। उदाहरण के लिए, मेष के लिए लाल वस्त्रों का दान मंगल को मज़बूत करता है, जबकि वृषभ के लिए सफेद वस्तु का दान शुक्र को शांत करता है।
ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि दान हमेशा जरूरतमंद लोगों को श्रद्धा और सच्चे मन से करना चाहिए, तभी उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। यह पूर्णिमा भक्ति, आस्था और परोपकार के माध्यम से आत्मिक उन्नति का अद्वितीय अवसर प्रदान करती है।

