द लोकतंत्र : हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। इस वर्ष यह तिथि 4 दिसंबर को मनाई जाएगी, जिसके बाद पौष का महीना आरंभ हो जाएगा। ज्योतिषविदों के अनुसार, यह पूर्णिमा इसलिए भी खास रहने वाली है क्योंकि इस दिन रवि योग का अत्यंत शुभ संयोग निर्मित हो रहा है। इसके साथ ही, यह साल की अंतिम पूर्णिमा भी है, जिसे अभूतपूर्व लाभ अर्जित करने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। मान्यता है कि इस पवित्र तिथि पर स्नान, दान और उपासना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
ब्रह्म मुहूर्त: देवी लक्ष्मी के आह्वान का सर्वोत्तम समय
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त की अबूझ घड़ी आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी है।
- शुभ काल: 4 दिसंबर को सुबह 4 बजकर 19 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 58 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा, यानी यह 39 मिनट का समय देवताओं की पूजा के लिए उत्तम है।
- शास्त्रों का मत: शास्त्रों में इस अबूझ घड़ी को ‘अमृत काल’ के समान माना गया है, जिसमें देवी लक्ष्मी की पूजा और दान-धर्म आदि के कार्यों से बड़ा लाभ मिल सकता है। ज्योतिषविदों का कहना है कि इस शुभ मुहूर्त में माँ लक्ष्मी के दिव्य मंत्रों का जाप करने से धनधान्य में अप्रत्याशित वृद्धि होती है।
माँ लक्ष्मी के दिव्य मंत्र और जाप की महिमा
आर्थिक स्थिति को सुधारने और सौभाग्य को आमंत्रित करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में इन मंत्रों का जाप करना परम कल्याणकारी माना गया है:
- कमला मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
- धन प्राप्ति मंत्र: ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:
- महालक्ष्मी मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥
इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप एकाग्रचित्त होकर करने से धन संबंधी बाधाएँ दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
रवि योग और दान का विशेष फल
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर रवि योग का होना इस तिथि के महत्व को और बढ़ा देता है।
- रवि योग का समय: 4 दिसंबर को रवि योग सुबह 6 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 54 मिनट तक रहने वाला है। ज्योतिष में रवि योग को अत्यंत शुभ माना जाता है, जिसमें किए गए कार्य सफलता और शुभ फल प्रदान करते हैं।
- दान की महत्ता: ज्योतिषविदों का कहना है कि इस शुभ मुहूर्त में दान-धर्म के कार्य करने वालों को बहुत लाभ मिलेगा। व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीबों को गुड़, तिल, घी, कम्बल और खाने की चीज़ों का दान करना चाहिए। कम्बल और गर्म कपड़े का दान पुण्य को कई गुना बढ़ा देता है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का यह दुर्लभ संयोग हर व्यक्ति को आध्यात्मिक शुद्धि और वित्तीय समृद्धि के लिए उपासना का सुअवसर प्रदान कर रहा है।

