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मोक्ष की साधना: 1 दिसंबर को ‘Mokshada Ekadashi’, व्रत के नियम और वर्जित कर्मों का पालन आत्मिक शुद्धि के लिए अनिवार्य

The loktnatra

द लोकतंत्र : हिंदू परंपरा में एकादशी का व्रत अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना गया है, जिसे आत्मिक शुद्धि और भगवान विष्णु व देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने का विशेष साधन समझा जाता है। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की इस एकादशी तिथि को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आज 30 नवंबर 2025 की रात 9 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर 1 दिसंबर 2025 शाम 7 बजकर 1 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के सिद्धांत के अनुसार, मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा।

एकादशी व्रत का आध्यात्मिक महत्व

मोक्षदा एकादशी नाम ही मोक्ष देने वाले इस व्रत के असाधारण महत्व को दर्शाता है। धार्मिक ग्रंथों में यह विश्वास है कि जो साधक निष्ठा, नियम और सच्चे मन से एकादशी का व्रत करता है, उसके पाप दूर होते हैं और जीवन में खुशी, सौभाग्य और समृद्धि आती है।

  • सकारात्मक ऊर्जा: भगवान विष्णु की कृपा से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • मानसिक लाभ: यह व्रत मानसिक तनाव को कम करता है और परिवार में सुख व शांति बनाए रखने में सहायक होता है, जिससे यह केवल धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि समग्र जीवन के लिए एक कल्याणकारी साधन बन जाता है।

मोक्षदा एकादशी पर वर्जित कर्म

व्रत को पूर्ण फलदायी बनाने के लिए, साधक को अनुशासन और संयम का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। ज्योतिषविद इस दिन कुछ गलतियाँ न करने की सलाह देते हैं:

1. आलस्य और विश्राम का त्याग

  • दोपहर में सोना या देर से उठना: एकादशी के दिन आलस्य त्यागना और प्रातः काल उठकर भगवान का स्मरण करना जरूरी है। बहुत देर तक सोना या दोपहर में विश्राम करना मन की शुद्धता और व्रत की आध्यात्मिक ऊर्जा को कम करता है।

2. तामसिक भोजन से दूरी

  • लहसुन-प्याज वर्जित: व्रत के दिन सादा सात्विक भोजन अपनाना चाहिए। तामसिक चीजें जैसे लहसुन और प्याज पवित्रता को प्रभावित करती हैं, इसलिए इनसे पूरी तरह बचना आवश्यक है।

3. मन और वाणी की शुद्धता

  • कटुवचन और नकारात्मक विचारों से बचें: व्रत में केवल शरीर ही नहीं, मन और वाणी की भी शुद्धता जरूरी है। कठोर शब्द कहना, किसी का अपमान करना या नकारात्मक सोच व्रत के प्रभाव को कम कर देती है।

4. तुलसी के नियम का पालन

  • तुलसी दल ना तोड़ें: एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को नहीं छूना चाहिए और ना ही इस दिन तुलसी का पत्ता तोड़ना चाहिए, क्योंकि तुलसी को भगवान विष्णु की अत्यंत प्रिय माना गया है।

मोक्षदा एकादशी का व्रत निष्ठा और सच्चे मन से करने पर ही भगवान विष्णु की सर्वोच्च कृपा प्राप्त होती है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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