द लोकतंत्र : हिंदू धर्म में एकादशी को भगवान विष्णु को समर्पित सर्वश्रेष्ठ तिथि माना जाता है, जिसमें मार्गशीर्ष (अगहन) महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली मोक्षदा एकादशी का अध्यात्मिक महत्व सर्वोपरि है। यह एकादशी न केवल साधक को मोक्ष, सौभाग्य और समृद्धि प्रदान करती है, बल्कि पितरों को भी मुक्ति दिलाने में सहायक मानी जाती है। इस वर्ष मोक्षदा एकादशी का व्रत सोमवार 1 दिसंबर 2025 को शुभ संयोगों के बीच मनाया जाएगा। स्मार्त और वैष्णव दोनों मतों के अनुसार एक ही दिन इस एकादशी का पुण्यकाल रहेगा, जिससे पूजा और उपायों का फल कई गुना बढ़ जाएगा।
मोक्षदा एकादशी का धार्मिक मर्म
मोक्षदा शब्द स्वयं में ही मोक्ष की भावना को समाहित किए हुए है। इस दिव्य तिथि पर व्रत और पूजन करने से जीवन के सभी कष्ट और पाप दूर होते हैं।
- पितरों की मुक्ति: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से साधक के पितरों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है, जिससे पितृदोष शांत होता है।
- लक्ष्मी-नारायण की कृपा: यह दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की संयुक्त कृपा प्राप्त करने का विशेष माध्यम है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और भौतिक समृद्धि आती है।
कष्ट निवारण और समृद्धि के अचूक दीप उपाय
मोक्षदा एकादशी के पावन दिन पर ज्योतिषीय उपाय और दीपदान को कष्टों के निवारण के लिए अचूक माना गया है।
1. मुख्य द्वार पर दीपदान (नकारात्मक ऊर्जा से बचाव)
- रक्षा कवच: अपने घर के मुख्य द्वार पर एक दीपक जलाकर जरूर रखें। यह दिव्य दीप नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोकता है और घर-परिवार के लिए एक रक्षा कवच की तरह काम करता है।
2. तुलसी के पास घी का दीपक (धन और सुख के लिए)
- शुभता का संचार: धन, सुख और समृद्धि के लिए मोक्षदा एकादशी पर सुबह और शाम दोनों ही समय तुलसी के पौधे के पास एक घी का दीपक जरूर जलाएँ। इसे अत्यंत शुभ माना जाता है और इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
3. विष्णु मंदिर में दीप प्रज्वलन (परेशानी निवारण)
- संकट मुक्ति: भगवान विष्णु के मंदिर में जाकर एक दीपक जलाएँ और प्रभु से अपने जीवन में चल रही परेशानियों को दूर करने की कामना करें।
4. पीपल वृक्ष के नीचे दीपदान (पितृ पूजन)
- पितरों का आशीर्वाद: मोक्षदा एकादशी का दिन पितृ पूजन के लिए विशेष होता है। हिंदू धर्म में पीपल वृक्ष में पितरों का वास बताया गया है। इसलिए इस दिन पीपल वृक्ष के नीचे भी एक दीप जलाएँ और पितरों की मुक्ति की प्रार्थना करें। इससे पितृ प्रसन्न होकर आपको आशीर्वाद देते हैं।
इन दिव्य उपायों के साथ-साथ एकादशी व्रत के नियमों का निष्ठापूर्वक पालन मोक्षदा एकादशी के पुण्य को सर्वोच्च स्तर तक पहुँचाता है।

