द लोकतंत्र : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार 28 नवंबर 2025 को गोवा में आयोजित श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ के 550वें वर्ष समारोह के अवसर पर भगवान राम की 77 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा न केवल गोवा में आस्था का एक नया केंद्र बन गई है, बल्कि यह एशिया में स्थापित भगवान राम की अब तक की सबसे ऊंची प्रतिमा भी है। यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भव्य रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
मूर्तिकला का महाकुंभ: राम सुतार की अद्भुत कृति
इस विशाल कांस्य प्रतिमा को तराशने का श्रेय प्रख्यात मूर्तिकार राम सुतार को जाता है, जो इससे पहले ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ जैसी विश्व प्रसिद्ध कृति का निर्माण कर चुके हैं।
- ऊँचाई का महत्व: दक्षिण गोवा में स्थापित इस प्रतिमा की ऊंचाई 77 फीट है, जो इसे विश्व भर में स्थापित भगवान राम की अन्य प्रतिमाओं से अलग करती है।
- संदर्भ: इसकी तुलना अयोध्या राम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को हुई रामलला की मूर्ति से की जा सकती है, जिसकी लंबाई 51 इंच है। गोवा की यह प्रतिमा भारत में आध्यात्मिक मूर्तिकला के बढ़ते आयाम और पैमाने को दर्शाती है।
मंदिर और मठों के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना
श्री संस्थान गोकर्ण जीवोत्तम मठ के 550वें वर्ष समारोह के दौरान इस प्रतिमा का अनावरण करना सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल होना यह दर्शाता है कि सरकार देश की प्राचीन विरासत के संरक्षण और पुनर्जागरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। यह प्रयास जन-जन को उनकी आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ने और राष्ट्रीय चेतना को सशक्त करने का माध्यम है।
- अयोध्या से गोवा तक: अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद, गोवा में इस विशाल प्रतिमा की स्थापना देश भर में राम की आस्था के प्रसार और गहनता को परिलक्षित करती है।
आस्था और पर्यटन का समन्वय
भगवान राम की ये विशालकाय प्रतिमाएं केवल धार्मिक महत्व तक ही सीमित नहीं रहतीं, बल्कि ये क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा देती हैं।
- सामाजिक प्रभाव: विश्लेषकों का मानना है कि 77 फुट ऊंची यह प्रतिमा अब गोवा आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगी। यह मठ और आसपास के क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राम सुतार जैसे मूर्तिकारों की कला और सरकार के संरक्षण प्रयासों के कारण, भारत की पौराणिक कथाओं के महानायक अब विशालकाय और चिरस्थायी रूपों में दुनिया के सामने आ रहे हैं, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।

