द लोकतंत्र : वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की दैनिक दिनचर्या में हुए एक अभूतपूर्व बदलाव ने हजारों भक्तों और स्थानीय प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा है। लंबे समय से निर्धारित ब्रह्म मुहूर्त की पदयात्रा, जो प्रतिदिन प्रातः 2 बजे निकलती थी, अब शनिवार से शाम 5 बजे स्थानांतरित कर दी गई है। यह निर्णय न केवल महाराज के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया गया है, बल्कि भीषण शीतलहर के बीच सड़कों पर प्रतीक्षा करने वाले भक्तों की सुविधा भी इसका एक मुख्य कारण मानी जा है।
परिवर्तन का कारण: स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सर्वोपरि
प्रेमानंद महाराज की एक झलक पाने के लिए देश-विदेश से भक्त वृंदावन पहुंचते हैं। पूर्व में, भक्तों को रात के 10-12 डिग्री सेल्सियस तापमान में खुले आसमान के नीचे घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। विशेषकर सर्दियों के मौसम में बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह अत्यंत कष्टकारी था। महाराज के अनुयायियों के अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी परामर्श और भक्तों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए आश्रम प्रबंधन ने शाम का समय चुनना उचित समझा।
प्रशासनिक चुनौतियां और रूट मैनेजमेंट
पदयात्रा के समय में हुए इस अचानक परिवर्तन ने मथुरा पुलिस के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। शाम 5 बजे का समय वृंदावन में पर्यटकों और स्थानीय यातायात के लिहाज से बेहद व्यस्त होता है।
- भक्तों की दोगुनी संख्या: समय बदलते ही शनिवार को सड़कों पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। जो भक्त रात के समय पहुंचने में असमर्थ थे, वे भी अब शाम की पदयात्रा में सम्मिलित हो रहे हैं।
- पुलिस का वक्तव्य: सीओ सदर संदीप सिंह ने पुष्टि की है कि रूट मैनेजमेंट अब प्राथमिकता है। पुलिस आश्रम से संपर्क में है ताकि यदि यह बदलाव स्थायी होता है, तो एक नया रूट मैप तैयार किया जा सके जिससे ट्रैफिक व्यवस्था बाधित न हो।
भव्य माहौल: श्रीकृष्ण शरणम् से केलिकुंज तक
- शनिवार शाम जब महाराज अपने अनुयायियों के साथ पैदल निकले, तो पूरा मार्ग जयकारों से गुंजायमान हो उठा। महाराज के साथ बाइकों और गाड़ियों का काफिला भी था, किंतु उनकी सहजता ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्तों ने इस बदलाव का स्वागत किया है, क्योंकि अब वे बिना किसी शारीरिक जोखिम के दर्शन लाभ ले पाएंगे।
वृंदावन जैसे धार्मिक केंद्र में इस तरह के बदलाव दूरगामी प्रभाव डालते हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन को बैरिकेडिंग और अतिरिक्त बल की तैनाती पर विचार करना होगा। श्रद्धा का यह महाकुंभ अब शाम की बेला में वृंदावन की सड़कों को एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा से भरने के लिए तैयार है।

