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षटतिला एकादशी 2026: 14 जनवरी को है साल की सबसे बड़ी एकादशी, तिल का एक छोटा सा दान बदल सकता है आपकी किस्मत

The loktnatra

द लोकतंत्र : हिंदू कैलेंडर के अनुसार, माघ महीने की सबसे खास एकादशी यानी ‘षटतिला एकादशी’ इस साल 14 जनवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तिल का दान करना और व्रत रखना बहुत ही शुभ माना जाता है। कहते हैं कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से तिल का दान करता है, उसके जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

क्या है षटतिला एकादशी और इसका महत्व?

षटतिला शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘षट’ यानी छह और ‘तिल’ यानी तिल। इस दिन तिल का छह अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल करने की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया दान न केवल कुंडली के दोषों को ठीक करता है, बल्कि पितृ दोष (पूर्वजों का आशीर्वाद न मिलना) से भी छुटकारा दिलाता है।

भक्तों का मानना है कि इस व्रत को करने से मन शांत रहता है, तनाव कम होता है और घर में सुख-शांति आती है। यह एकादशी परिवार में खुशहाली और तरक्की लाने वाली मानी जाती है।

क्यों प्रचलित है तिल दान की कथा?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पुराने समय में राजा हरिहर ने इस दिन विधि-विधान से तिल का दान किया था। इसके बाद उनके परिवार और पूर्वजों के सारे दोष खत्म हो गए और उन्हें सुख-समृद्धि मिली। इसी तरह, यह माना जाता है कि इस दिन दान करने से देवताओं और पितरों की विशेष कृपा मिलती है। आज के समय में, जब लोग मानसिक तनाव और आपसी झगड़ों से परेशान रहते हैं, यह एकादशी मन को शांति देने और सकारात्मक ऊर्जा भरने का एक अच्छा जरिया है।

कैसे करें तिल का दान और क्या होगा लाभ?

षटतिला एकादशी पर दान करना बहुत आसान है। इस दिन आप तिल, गुड़ या तिल से बनी मिठाइयां (जैसे गजक या लड्डू) गरीबों, ब्राह्मणों या किसी मंदिर में दान कर सकते हैं।

  • दान की विधि: दान करते समय आपका मन साफ होना चाहिए। मन में अपने पूर्वजों (पितरों) को याद करें और उनकी शांति की प्रार्थना करें।
  • मिलेगा यह फायदा: जानकारों का मानना है कि तिल दान करने से आर्थिक स्थिति यानी पैसों की तंगी दूर होती है और घर के सदस्यों के बीच प्यार बढ़ता है। यह न केवल धार्मिक रूप से फलदायी है, बल्कि मानसिक संतुलन के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है।

क्यों जरूरी है इस दिन का पालन?

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई शांति की तलाश में है। षटतिला एकादशी हमें अपनी जड़ों और धर्म से जुड़ने का मौका देती है। इस दिन व्रत रखने और सादा जीवन जीने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं। अगर आप व्रत नहीं भी रख सकते, तो केवल तिल का दान करने मात्र से ही आप पुण्य कमा सकते हैं।

कुल मिलाकर, 14 जनवरी को पड़ने वाली यह एकादशी आपके जीवन में खुशियों का नया सवेरा ला सकती है। श्रद्धा भाव से किया गया एक छोटा सा दान आपके पूरे परिवार के लिए शुभ साबित हो सकता है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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