द लोकतंत्र : उत्तर भारत में शीतलहर का सितम जारी है, लेकिन जब बात आस्था की हो, तो कड़ाके की ठंड भी बेअसर साबित होती है। आज बुधवार, 14 जनवरी को षटतिला एकादशी के पावन मौके पर प्रयागराज के माघ मेले में श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। हाड़ कपा देने वाली ठंड और कोहरे के बीच लाखों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर भगवान विष्णु से सुख-समृद्धि की कामना की।
सुबह 6 बजे तक ही साढ़े नौ लाख लोगों ने किया स्नान
माघ मेला प्रशासन के मुताबिक, आज श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। मेले की सुरक्षा और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी ऋषि राज ने बताया कि एकादशी के पर्व पर सुबह होने से पहले ही भक्तों की भीड़ घाटों पर जुटने लगी थी। उन्होंने ताज़ा आँकड़े देते हुए जानकारी दी कि सुबह 6 बजे तक ही लगभग 9 लाख 50 हजार लोग पवित्र स्नान कर चुके थे। संगम के हर घाट पर ‘हर-हर गंगे’ के जयकारे गूँज रहे हैं और लोग कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
संक्रांति से पहले ही संगम तट पर दिखा ‘मिनी कुंभ’
वैसे तो इस साल मकर संक्रांति का मुख्य उत्सव कल मनाया जाएगा, लेकिन तिथियों के संयोग के कारण आज 14 जनवरी को ही माघ मेले में उत्सव जैसा माहौल बन गया है। एकादशी और संक्रांति की पूर्व संध्या ने भक्तों को दोहरे पुण्य का अवसर दे दिया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो आज और कल, दोनों दिन स्नान और दान-पुण्य करना चाहते हैं। संगम तट पर चारों ओर भजन-कीर्तन और संतों के प्रवचनों से माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।
षटतिला एकादशी का क्या है खास महत्व?
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘षटतिला एकादशी’ कहा जाता है। जैसा कि नाम से ही पता चलता है, इस दिन ‘तिल’ का बहुत बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन तिल का छह अलग-अलग तरीकों से उपयोग करना चाहिए:
- तिल के पानी से स्नान
- तिल का उबटन
- तिल से तर्पण
- तिल का दान
- तिल का भोजन (सेवन)
- तिल से हवन
माना जाता है कि ऐसा करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होता है। संगम तट पर श्रद्धालु न केवल स्नान कर रहे हैं, बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार तिल, गुड़ और ऊनी वस्त्रों का दान भी कर रहे हैं।
प्रशासन की पुख्ता तैयारी
इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। जल पुलिस के जवान और गोताखोर लगातार गश्त कर रहे हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। साथ ही, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चेंजिंग रूम और मेडिकल कैंप की व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। मेला प्रशासन को उम्मीद है कि शाम तक यह संख्या 15 लाख के पार पहुँच सकती है।

