द लोकतंत्र : आज 1 जनवरी 2026 को नूतन वर्ष के उदय के साथ ही चारों ओर उत्साह और नई आशाओं का वातावरण है। भारतीय शास्त्रों में दीपक को महज प्रकाश का स्रोत नहीं, अपितु ज्ञान, चेतना और दिव्यता का प्रतीक माना गया है। वास्तु शास्त्र और वैदिक परंपराओं के अनुसार, वर्ष के प्रथम दिन किए गए विशिष्ट दीपदान से न केवल घर की नकारात्मकता नष्ट होती है, बल्कि यह आगामी 365 दिनों के लिए सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीपक की लौ ब्रह्मांडीय ऊर्जा को आकर्षित करने में सक्षम होती है।
दिशा एवं स्थान का महत्व: वास्तु सम्मत दीपदान
वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के अनुरूप यदि सही दिशा में दीपक जलाया जाए, तो उसके परिणाम अत्यंत प्रभावशाली होते हैं।
- ईशान कोण (उत्तर-पूर्व): इस दिशा को देवताओं का निवास स्थल माना जाता है। नए साल की सुबह और शाम यहाँ घी का दीपक प्रज्वलित करने से घर में विराजमान वास्तु दोषों का निवारण होता है और मानसिक शांति मिलती है।
- मुख्य द्वार (चौखट): मान्यता है कि सायंकाल के समय घर की चौखट पर दीपक रखने से देवी लक्ष्मी का आगमन होता है। यह नकारात्मक शक्तियों को घर के भीतर प्रवेश करने से रोकता है।
धार्मिक अनुष्ठान: तुलसी और मंदिर में समर्पण
हिंदू धर्म में तुलसी को पूजनीय माना गया है। वर्ष 2026 के प्रथम दिन तुलसी के क्यारे में दीपक जलाने से पारिवारिक कलह समाप्त होती है।
- सरोवर एवं सार्वजनिक मंदिर: यदि संभव हो, तो निकटवर्ती किसी पवित्र नदी, सरोवर या मंदिर में दीपदान अवश्य करें। शास्त्रों के अनुसार बहते जल या देव स्थान पर दीपदान करने से कुंडली के ग्रह दोष, विशेषकर शनि और राहु के प्रतिकूल प्रभाव कम होते हैं।
- पूजाघर की सतत ज्योति: घर के मंदिर में अखंड ज्योति या शुद्ध घी का दीपक जलाकर अपने इष्ट देव का ध्यान करें। यह वर्षभर ऊर्जावान बने रहने का एक संकल्प है।
विशेषज्ञ परामर्श एवं भावी प्रभाव
- आध्यात्मिक गुरुओं का तर्क है कि सामूहिक दीपदान से वातावरण के सूक्ष्म कीटाणुओं का नाश होता है और ऑक्सीजन के स्तर में भी सुधार होता है। आगामी समय में ‘इको-फ्रेंडली’ दीपक और तिल के तेल का प्रयोग पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए एक बड़ा ट्रेंड बनकर उभरेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग नियमित संध्या वंदन के समय दीपक जलाते हैं, उनकी निर्णय क्षमता और एकाग्रता साधारण व्यक्तियों से बेहतर होती है।
निष्कर्षतः, दीपक केवल मिट्टी का एक पात्र नहीं, बल्कि हमारी श्रद्धा का वह प्रकाश है जो जीवन के जटिल अंधकार को काटने की शक्ति रखता है। नववर्ष 2026 की इस शुभ बेला पर दीपदान की यह परंपरा हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है और एक सकारात्मक भविष्य की नींव रखती है।

