द लोकतंत्र : सनातन धर्म में सूर्य देव को ‘प्रत्यक्ष देवता’ माना गया है, जो सृष्टि की ऊर्जा और चेतना के प्रमुख स्रोत हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवग्रहों में सूर्य का स्थान सर्वोपरि है और रविवार का दिन विशेष रूप से उनकी साधना के लिए नियत किया गया है। धार्मिक ग्रंथों और प्राचीन संहिताओं में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि सूर्य देव की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए मात्र पूजा-अर्चना ही पर्याप्त नहीं है, अपितु रविवार को आहार में भी विशेष शुचिता बरतना अनिवार्य है। आज के विशेष प्रतिवेदन में हम उन खाद्य पदार्थों का विश्लेषण करेंगे जिन्हें रविवार को ग्रहण करना शास्त्रीय रूप से वर्जित माना गया है।
आहार और ग्रह दशा: किन वस्तुओं से बनाएं दूरी?
शास्त्रीय मान्यता है कि विशिष्ट खाद्य पदार्थ विशिष्ट ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा को जाग्रत करते हैं।
- लाल साग: यद्यपि सफेद या पीले रंग की वस्तुएं सूर्य को प्रिय हैं, किंतु लाल साग को वैष्णव धर्म और स्मृति ग्रंथों में अशुभ माना गया है। इसे विशिष्ट धार्मिक संदर्भों में मृत्यु का प्रतीक या निषेध माना जाता है, अतः रविवार को इसका त्याग करना चाहिए।
- लहसुन और प्याज: आयुर्वेद में इन्हें औषधीय गुणों से युक्त माना गया है, किंतु अध्यात्म में इन्हें ‘तामसिक’ श्रेणी में रखा गया है। चूंकि रविवार का दिन पूर्णतः सात्विकता और सूर्य की पवित्र ऊर्जा के अवशोषण का है, इसलिए तामसिक भोजन से सूर्य का शुभ प्रभाव नष्ट हो जाता है।
मसूर की दाल और तामसिक प्रवृत्ति: एक विश्लेषण
मसूर की दाल को लेकर शास्त्रों में अत्यंत सख्त नियम हैं।
- विद्वानों का तर्क है कि मसूर दाल में प्रोटीन की मात्रा अत्यंत प्रबल होती है, जो इसे मांसाहार के तुल्य प्रभावशाली बनाती है। यही कारण है कि इसे कभी भी ‘देव भोग’ के रूप में अर्पित नहीं किया जाता। रविवार को इसका सेवन करने से सूर्य के अग्नि तत्व का असंतुलन हो सकता है, जिसका सीधा प्रभाव व्यक्ति के आत्मविश्वास पर पड़ता है।
मांसाहार और मदिरा: अशुभता का सर्वोच्च स्तर
- सूर्य प्रकाश और सत्य का प्रतीक हैं। रविवार के दिन मांसाहार और शराब का सेवन न केवल धार्मिक अपराध है, बल्कि यह कुंडली में सूर्य को गंभीर रूप से दूषित करता है। ऐसा करने से पारिवारिक कलह, मान-सम्मान की हानि और करियर में बाधाएं आने लगती हैं।
निष्कर्षतः, सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए रविवार को संयम और शुद्धि अनिवार्य है। वर्जित खाद्य पदार्थों का त्याग करके और सात्विक आहार ग्रहण करके व्यक्ति न केवल सूर्य दोष से मुक्ति पा सकता है, अपितु अपने जीवन में तेज और ओज की वृद्धि भी कर सकता है।

