द लोकतंत्र : नववर्ष 2026 के आगमन के साथ ही उपहारों के लेन-देन का सिलसिला तेज हो गया है। भारतीय परंपरा में उपहार केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि दाता और ग्राही के बीच ऊर्जा के आदान-प्रदान का माध्यम है। शास्त्रों और वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञों का मानना है कि गलत उपहारों का चयन न केवल सौभाग्य को बाधित करता है, अपितु सुख-समृद्धि में भी बाधा उत्पन्न कर सकता है। जहाँ आधुनिकता में लोग सुंदरता देखकर उपहार चुनते हैं, वहीं धार्मिक दृष्टिकोण से उनका प्रतीकात्मक महत्व समझना अपरिहार्य है।
वर्जित उपहार: धार्मिक एवं वास्तु सम्मिलित विश्लेषण
ज्योतिषविदों ने कुछ विशिष्ट वस्तुओं को नए साल जैसे शुभ अवसर पर उपहार स्वरूप देने से वर्जित किया है।
- कछुआ (कूर्म अवतार): यद्यपि कछुआ भगवान विष्णु का प्रतीक और स्थिरता का सूचक है, किंतु इसे उपहार में देना निषिद्ध माना गया है। वास्तु के अनुसार, कछुए की स्थापना एक विशिष्ट विधि और मंत्रोपचार के बिना करने पर यह आर्थिक अवरोध उत्पन्न कर सकता है। अनजाने में दिया गया यह उपहार प्राप्तकर्ता के लिए मानसिक अशांति ला सकता है।
- काला पर्स एवं राहु-शनि का प्रभाव: रंग विज्ञान के अनुसार काला रंग राहु और शनि से सम्बद्ध है। नए साल पर काला पर्स गिफ्ट करने से धन का अपव्यय बढ़ने और बरकत में कमी आने की धार्मिक मान्यता है। महालक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए लाल या सुनहरे रंग के विकल्प कहीं अधिक श्रेष्ठ हैं।
रिश्तों पर प्रतीकात्मक प्रहार: घड़ी, रुमाल और परफ्यूम
समय और भावनाओं का संबंध अत्यंत नाजुक होता है, और उपहार इसमें निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
- घड़ी: घड़ी को समय के निरंतर चलने और अंततः समाप्त होने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। उपहार में घड़ी देना संबंधों में ‘समय की सीमा’ तय करने जैसा माना जाता है, जो कालांतर में दूरी पैदा कर सकता है।
- रुमाल: विदाई और आंसुओं का प्रतीक होने के कारण रुमाल गिफ्ट करना शुभ नहीं माना जाता। लोक मान्यताओं के अनुसार, इससे भावनात्मक विच्छेद और दुख बढ़ने की संभावना होती है।
- परफ्यूम (इत्र): आधुनिक चकाचौंध में इत्र एक लोकप्रिय उपहार है, किंतु शास्त्रीय मत अनुसार जैसे खुशबू क्षणभंगुर होती है, वैसे ही रिश्तों में भी अस्थिरता आ सकती है।
वरिष्ठ वास्तु विशेषज्ञों का तर्क है कि उपहार देते समय ‘भाव’ के साथ-साथ ‘तत्व’ का ध्यान रखना अनिवार्य है। 2026 में लोग पुनः पारंपरिक और सतत (Sustainable) उपहारों की ओर लौट रहे हैं। आने वाले समय में पौधे, धातु के शुभ प्रतीक और आध्यात्मिक पुस्तकों का चलन बढ़ेगा, जो सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार करते हैं।
निष्कर्षतः, नववर्ष पर उपहार देने का मुख्य उद्देश्य प्रेम और सद्भावना का विस्तार है। शास्त्रोक्त वर्जित वस्तुओं का त्याग करके हम न केवल प्राचीन ज्ञान का सम्मान करते हैं, अपितु अपने प्रियजनों के जीवन में मंगलकारी ऊर्जा का प्रवेश भी सुनिश्चित करते हैं। सही चुनाव ही सच्ची शुभकामना है।

