द लोकतंत्र : भारतीय संस्कृति में ‘गृह’ को मात्र आवास नहीं, अपितु एक मंदिर की संज्ञा दी गई है। वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के प्राचीन सिद्धांतों के अनुसार, घर की सुख-शांति वहाँ प्रवाहित होने वाली सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) पर निर्भर करती है। किंतु, आधुनिक जीवनशैली में हम अक्सर जाने-अनजाने ऐसी वस्तुओं का संग्रह कर लेते हैं, जो नकारात्मक ऊर्जा के लिए उत्प्रेरक का कार्य करती हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि ये वस्तुएं मानसिक तनाव, आर्थिक अवरोध और पारिवारिक कलह का प्रमुख कारण बनती हैं।
वास्तु दोष उत्पन्न करने वाली प्रमुख वस्तुएं
वास्तु विशेषज्ञों ने चार ऐसी वस्तुओं को चिह्नित किया है, जो सकारात्मकता को ‘दीमक’ की भांति नष्ट करती हैं:
खंडित बर्तन एवं सामग्री: वास्तु विज्ञान में टूटे हुए बर्तनों को दुर्भाग्य का सूचक माना गया है। खंडित वस्तुएं ऊर्जा के प्रवाह को बाधित करती हैं, जिससे धन हानि की संभावना प्रबल होती है। अतः किसी भी प्रकार की टूटी हुई चीज को घर में रखना अशुभ है।
- रुकी हुई घड़ियां: घड़ी प्रगति और निरंतर चलायमान जीवन का प्रतीक है। बंद पड़ी घड़ी घर के सदस्यों की उन्नति को ठहराव में बदल देती है। यह समय के अशुभ चक्र को निमंत्रण देती है।
- अशुभ चित्रण: युद्ध, हिंसा, रोते हुए बच्चे या उदास परिदृश्य वाली तस्वीरें घर में अवसाद (Depression) का वातावरण निर्मित करती हैं।
- समाधान: वास्तु विशेषज्ञ परामर्श देते हैं कि सदैव हंसते हुए चेहरे, खिलते हुए पुष्प या प्राकृतिक सौंदर्य वाले चित्रों का ही चयन करें।
अवांछित सामान और आर्थिक अड़चन
- घर का वह हिस्सा जहाँ वर्षों से अनुपयोगी सामान जमा है, वहाँ नकारात्मक ऊर्जा का सघन केंद्र बन जाता है। नियमित स्वच्छता के अभाव में यह ‘क्ल्टर’ (Clutter) न केवल बीमारियों को जन्म देता है, अपितु नवाचार और नई अवसरों के मार्ग को भी अवरुद्ध कर देता है। महीने में कम से कम एक बार गहन सफाई करके बेकार सामग्री का निष्कासन अनिवार्य है।
वास्तु शास्त्र के ये नियम पूर्णतः तार्किक और मनोवैज्ञानिक हैं। एक स्वच्छ और व्यवस्थित घर स्वयं में ऊर्जा का स्रोत होता है। यदि आप इन नकारात्मक वस्तुओं का त्याग करते हैं, तो निश्चित रूप से घर के वातावरण में एक सकारात्मक बदलाव महसूस होगा, जो दीर्घकालिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।
निष्कर्षतः, घर को सकारात्मक बनाए रखना एक निरंतर प्रक्रिया है। जागरूकता और वास्तु सम्मत जीवनशैली ही खुशहाली की कुंजी है।

