द लोकतंत्र : हमारे शास्त्रों में भोजन को केवल पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि ‘परब्रह्म’ का रूप माना गया है। हम जैसा अन्न खाते हैं, वैसा ही हमारा मन और विचार बनते हैं। पुराने समय में बुजुर्ग खाने-पीने के नियमों को लेकर बहुत सख्त होते थे, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम इन छोटी-छोटी बातों को भूलते जा रहे हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, अनजाने में की गई ये गलतियां घर में कंगाली, पति-पत्नी के बीच तनाव और पारिवारिक कलह का बड़ा कारण बन सकती हैं। आइए जानते हैं भोजन से जुड़े उन नियमों के बारे में जो आपके घर की खुशहाली तय करते हैं।
पति-पत्नी का एक थाली में खाना: प्यार या वास्तु दोष?
आजकल कई जोड़े प्यार जताने के लिए एक ही थाली में साथ बैठकर भोजन करते हैं। सुनने में यह रोमांटिक लग सकता है, लेकिन वास्तु शास्त्र इसे शुभ नहीं मानता। इसके पीछे एक गहरा मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण है।
वास्तु के अनुसार, परिवार के मुखिया की जिम्मेदारी पत्नी के साथ-साथ बच्चों और माता-पिता के प्रति भी होती है। जब पति-पत्नी एक ही थाली में खाते हैं, तो मुखिया का झुकाव केवल पत्नी की ओर बढ़ जाता है, जिससे वह बाकी सदस्यों की अनदेखी करने लगता है। इससे परिवार में ईर्ष्या, भेदभाव और कलह का माहौल बनता है, जो अंततः घर की शांति भंग कर देता है।
बिस्तर पर बैठकर खाना: गरीबी को न्योता
आजकल टीवी देखते हुए या आलस के कारण बिस्तर पर ही खाना खाने का चलन बढ़ गया है। वास्तु शास्त्र इसकी कड़ी निंदा करता है। बिस्तर सोने की जगह है और भोजन को देवी अन्नपूर्णा का प्रसाद माना जाता है।
बिस्तर पर बैठकर खाना खाना मां अन्नपूर्णा का अपमान करने जैसा है। मान्यता है कि जो लोग ऐसा करते हैं, उनके घर से देवी लक्ष्मी चली जाती हैं। इससे घर में आर्थिक तंगी, कर्ज और दरिद्रता (गरीबी) आने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, इससे सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है।
सुख-समृद्धि के लिए अपनाएं ये आदतें
अगर आप चाहते हैं कि आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा और बरकत बनी रहे, तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें:
- अनुशासन: हमेशा जमीन पर आसन बिछाकर या डाइनिंग टेबल पर तमीज से बैठकर भोजन करें।
- शुक्रगुजार रहें: खाना शुरू करने से पहले ईश्वर का धन्यवाद जरूर करें, इससे घर में सौभाग्य आता है।
- सामूहिक भोजन: परिवार के सभी सदस्य साथ बैठकर खाएं, लेकिन सबकी थालियां अलग-अलग होनी चाहिए। इससे आपसी सम्मान और एकता बढ़ती है।
छोटे-छोटे बदलाव ही बड़ी खुशियां लाते हैं। अगर हम अपनी रोजमर्रा की आदतों को शास्त्रों और वास्तु के अनुरूप ढाल लें, तो जीवन से कंगाली और क्लेश को दूर रखा जा सकता है।

