द लोकतंत्र : भारत सरकार द्वारा निर्धारित आधार और पैन कार्ड को परस्पर जोड़ने की समय-सीमा अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। आज 31 दिसंबर 2025 को इस प्रक्रिया का अंतिम दिन है। आयकर विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि 1 जनवरी 2026 से उन सभी पैन कार्डों को निष्क्रिय (Inoperative) घोषित कर दिया जाएगा, जो आधार से लिंक नहीं हैं। यह कदम न केवल कर चोरी को रोकने की एक रणनीति है, अपितु राष्ट्र की डिजिटल अर्थव्यवस्था को पारदर्शी बनाने का एक महत्वपूर्ण स्तंभ भी है। करोड़ों करदाताओं के लिए यह समय अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि एक छोटी सी चूक उनके बैंकिंग और निवेश संबंधी कार्यों में गतिरोध पैदा कर सकती है।
निष्क्रिय पैन के प्रभाव: बैंकिंग और निवेश पर संकट
आयकर अधिनियम की धारा 139AA के अंतर्गत पैन का निष्क्रिय होना किसी व्यक्ति की वित्तीय पहचान के अस्थायी निलंबन जैसा है।
- बैंकिंग बाधाएं: 1 जनवरी के बाद आप नया बैंक खाता नहीं खोल पाएंगे और न ही निश्चित सीमा से अधिक का नकद लेनदेन कर सकेंगे।
- टीडीएस की मार: निष्क्रिय पैन धारकों पर उच्च दर (सामान्यतः 20%) से TDS काटा जाएगा। इसके अतिरिक्त, लंबित इनकम टैक्स रिफंड भी जारी नहीं किए जाएंगे।
- शेयर बाजार: डीमैट खाता संचालित करने और म्युचुअल फंड में निवेश करने के लिए सक्रिय पैन अनिवार्य है, अतः निवेशकों के पोर्टफोलियो पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
सत्यापन प्रक्रिया: डिजिटल एवं एसएमएस माध्यम
सरकार ने Status चेक करने के लिए अत्यंत सरल प्रणालियां विकसित की हैं, ताकि अंतिम समय में भी नागरिक सजग हो सकें।
- ई-फाइलिंग पोर्टल: आधिकारिक वेबसाइट पर ‘क्विक लिंक्स’ में जाकर पैन और आधार विवरण भरकर तुरंत स्थिति का पता लगाया जा सकता है।
- एसएमएस सेवा: इंटरनेट विहीन उपयोगकर्ताओं के लिए 567678 या 56161 पर ‘UIDPAN’ फॉर्मेट में मैसेज भेजकर पुष्टि प्राप्त करने की सुविधा दी गई है।
सुधार और जुर्माना: अंतिम समय के लिए परामर्श
- यदि आपका डेटा मैच नहीं होने के कारण लिंकिंग विफल होती है, तो बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण या डेटा करेक्शन ही एकमात्र विकल्प है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, 31 दिसंबर के बाद पैन को पुनः सक्रिय कराने के लिए 1,000 रुपये का विलंब शुल्क देना होगा। यह प्रक्रिया 7 से 30 दिन का समय ले सकती है, जिस दौरान आपकी सभी बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित रहेंगी।
वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का मानना है कि सरकार इस बार समय-सीमा बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। भविष्य में आधार-पैन का एकीकरण ‘वन नेशन, वन आईडी’ की दिशा में एक नींव तैयार करेगा। आगामी वित्तीय वर्ष से बिना लिंक्ड दस्तावेजों के किसी भी प्रकार की सरकारी सब्सिडी या लाभ प्राप्त करना असंभव हो सकता है।
निष्कर्षतः, 31 दिसंबर की यह डेडलाइन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक वित्तीय सुरक्षा कवच है। अंतिम क्षण की तकनीकी गड़बड़ियों से बचने के लिए अभी अपना स्टेटस चेक करें और यदि लिंकिंग अधूरी है, तो उसे तत्काल पूर्ण करें। आपका सजग कदम ही आपके आर्थिक भविष्य को सुरक्षित बनाएगा।

