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डिजिटल युग का नया खतरा: AI चैटबॉट्स पर इन क्वेरीज़ से बचें, सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में हैं आपके सभी Search Logs

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द लोकतंत्र : आधुनिक जीवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट्स एक अपरिहार्य टूल बन चुके हैं। वे जानकारी ढूंढने से लेकर जटिल काम आसान करने तक, हर जगह मौजूद हैं। हालाँकि, इस सुविधा के साथ एक नया और गंभीर डिजिटल खतरा भी उभरा है। कई देशों में साइबर कानून इतने सख्त हो चुके हैं कि AI चैटबॉट्स से गलत या गैर-कानूनी जानकारी मांगना भी सीधे अपराध की श्रेणी में आ सकता है। यह डिजिटल दुनिया की वह सच्चाई है जहाँ एक छोटी सी ‘जिज्ञासा’ भी आपको कानूनी जाल में फंसा सकती है।

अपराध की श्रेणी में आने वाले सवाल

भारत के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और अन्य साइबर सुरक्षा कानूनों के तहत, निम्नलिखित प्रकार की जानकारी मांगना या उसका प्रयास करना भी संदिग्ध गतिविधि माना जाता है:

  • गैर-कानूनी निर्माण: हथियार बनाना, विस्फोटक तैयार करना या ड्रग्स बनाने जैसी जानकारी मांगना।
  • साइबर हमले: बैंकिंग सिस्टम हैक करना, किसी की जानकारी चुराना या बड़े साइबर अटैक को अंजाम देने के तरीके पूछना।
  • हिंसा और दंगा: हिंसा भड़काने, दंगे फैलाने या अवैध संगठन से जुड़े सवालों पर प्रतिक्रिया मांगना गंभीर अपराध बन सकता है।

सुरक्षा एजेंसियाँ ऐसे सवालों पर तुरंत अलर्ट हो जाती हैं, क्योंकि सिस्टम लॉग्स में आपकी हर क्वेरी रिकॉर्ड होती है, जिसके आधार पर आप पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और निजी डेटा से खिलवाड़

कुछ सवाल सीधे तौर पर देश की सुरक्षा और व्यक्तिगत निजता को खतरा पहुंचाते हैं, जिसकी सज़ा और भी कठोर है:

  • संवेदनशील सरकारी डेटा: पुलिस नेटवर्क कैसे काम करता है, सैन्य सिस्टम कैसे तोड़े जाते हैं, या सरकारी वेबसाइटों में घुसपैठ कैसे करें—ऐसे सवाल पूछना देश की सुरक्षा से खिलवाड़ माना जाता है और यह कई देशों में जासूसी या साइबर आतंकवाद की श्रेणी में आता है।
  • निजी जानकारी निकालना: किसी व्यक्ति का पता, बैंक डिटेल, लोकेशन या निजी डेटा चैटबॉट के जरिए पूछना साइबर स्टॉकिंग और डेटा चोरी के अंतर्गत आता है। डिजिटल सिस्टम में ऐसी क्वेरी सेव हो जाती है और शिकायत होने पर आसानी से ट्रैक किया जा सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह: कैसे रहें सुरक्षित?

डिजिटल विशेषज्ञों का मानना है कि AI का उपयोग करते समय आत्म-नियमन (Self-Regulation) आवश्यक है। हर सवाल सोच-समझकर पूछें क्योंकि आपका रिकॉर्ड हमेशा सेव रहता है।

  • जागरूकता: साइबर सुरक्षा कानूनों के प्रति जागरूक रहें।
  • सीमा: मज़ाक या प्रयोग में भी खतरनाक या प्रतिबंधित जानकारी न मांगें।
  • उद्देश्य: चैटबॉट का उपयोग हमेशा रचनात्मक और कानूनी रूप से स्वीकार्य जानकारी प्राप्त करने के लिए करें, न कि दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए।

डिजिटल दुनिया की यह सच्चाई है कि जिज्ञासा की सीमाएँ अब कानूनी सीमाओं में बंध चुकी हैं।

Team The Loktantra

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लोकतंत्र की मूल भावना के अनुरूप यह ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां स्वतंत्र विचारों की प्रधानता होगी। द लोकतंत्र के लिए 'पत्रकारिता' शब्द का मतलब बिलकुल अलग है। हम इसे 'प्रोफेशन' के तौर पर नहीं देखते बल्कि हमारे लिए यह समाज के प्रति जिम्मेदारी और जवाबदेही से पूर्ण एक 'आंदोलन' है।

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