द लोकतंत्र : भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का विस्तार शिक्षा से लेकर कॉर्पोरेट जगत तक अभूतपूर्व गति से हुआ है। ChatGPT, Google Gemini और Grok जैसे प्लेटफॉर्म दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। यद्यपि ये उपकरण मानवीय क्षमता को बढ़ाने में क्रांतिकारी सिद्ध हो रहे हैं, किंतु साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। एआई चैटबॉट्स के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करना न केवल आपकी गोपनीयता का उल्लंघन कर सकता है, बल्कि यह गलत फैसलों और कानूनी पेचीदगियों का कारण भी बन सकता है।
डेटा प्रसंस्करण और गोपनीयता: अदृश्य निगरानी
एआई मॉडल के कार्य करने की पद्धति डेटा पर आधारित होती है। उपभोक्ता द्वारा लिखा गया प्रत्येक शब्द सर्वर पर संग्रहित किया जाता है।
- वित्तीय एवं निजी जोखिम: कभी भी एआई को अपना आधार, पैन, पासवर्ड या बैंक विवरण न बताएं। कंपनियां इन संवादों का उपयोग एल्गोरिदम को सुधारने के लिए करती हैं, जिसका अर्थ है कि आपकी निजी जानकारी किसी मानवीय समीक्षक की दृष्टि में आ सकती है।
- चिकित्सीय परामर्श का अभाव: एआई एक भाषा मॉडल है, न कि एक प्रमाणित चिकित्सक। जटिल बीमारियों के लक्षणों या दवाओं के लिए AI पर भरोसा करना जानलेवा हो सकता है, क्योंकि यह आपकी शारीरिक जांच और मेडिकल हिस्ट्री से अनभिज्ञ होता है।
भ्रामक सूचनाएं और कानूनी मर्यादा
एआई की एक बड़ी सीमा ‘हैलुसिनेशन’ (Hallucination) है, जहाँ यह अत्यंत आत्मविश्वास के साथ गलत तथ्य प्रस्तुत कर सकता है।
- सत्यता की जांच: कानूनी परामर्श, टैक्स प्लानिंग या निवेश जैसे विषयों पर AI पुरानी या गलत जानकारी दे सकता है। आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि किए बिना इन पर अमल करना वित्तीय हानि का कारण बन सकता है।
- अवैध अनुरोध: हैकिंग या फ्रॉड जैसे गैरकानूनी कार्यों की रणनीति पूछना आपको कानूनी निगरानी (Surveillance) में ला सकता है। प्लेटफॉर्म की नीतियां ऐसी पूछताछ को सुरक्षा एजेंसियों को रिपोर्ट करने की अनुमति देती हैं।
एआई सहानुभूतिपूर्ण भाषा का प्रयोग अवश्य कर सकता है, किंतु इसमें वास्तविक मानवीय संवेदनाओं का अभाव होता है। मानसिक स्वास्थ्य, गंभीर निजी संकट या जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में मशीनी सुझाव एकांगी हो सकते हैं। भविष्य में एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच, मानवीय विवेक और विशेषज्ञों की राय का महत्व अपरिवर्तनीय रहेगा।
निष्कर्षतः, एआई चैटबॉट्स एक कुशल सहायक हो सकते हैं, किंतु उन्हें जीवन का नियामक बनाना जोखिमपूर्ण है। अपनी संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखना और मशीनी ज्ञान को मानवीय तर्क की कसौटी पर परखना ही डिजिटल युग में सुरक्षित रहने का एकमात्र मंत्र है।

