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दीपिंदर गोयल का Temple डिवाइस बना चर्चा का विषय; ₹225 करोड़ के निवेश से दिमाग पर चल रही बड़ी रिसर्च

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द लोकतंत्र : भारतीय स्टार्टअप जगत के दिग्गज और जोमैटो (Zomato) के संस्थापक दीपिंदर गोयल एक बार फिर सुर्खियों में हैं, किंतु इस बार कारण व्यावसायिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक है। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान उनकी कनपटी (Temple) पर लगा एक छोटा धात्विक उपकरण चर्चा का केंद्र बन गया। प्रारंभ में सोशल मीडिया पर इसे फैशन एक्सेसरी माना गया, किंतु अब पुष्टि हो चुकी है कि यह ‘Temple’ नामक एक अत्यंत उन्नत न्यूरोलॉजिकल रिसर्च टूल है। यह डिवाइस गोयल की निजी पहल ‘Continue Research’ का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य इंसानी दिमाग के बूढ़े होने की प्रक्रिया को समझना और उसे धीमा करना है।

तकनीकी पक्ष: क्या है ‘Temple’ डिवाइस?

यह उपकरण कोई साधारण फिटनेस ट्रैकर नहीं है। यह एक एक्सपेरिमेंटल वियरेबल है जो ‘सेरेब्रल ब्लड फ्लो’ (Cerebral Blood Flow) को रियल-टाइम में मापता है।

  • कार्यप्रणाली: यह डिवाइस दिमाग की धमनियों में होने वाले रक्त प्रवाह की सटीक निगरानी करता है। वैज्ञानिक रूप से, मस्तिष्क तक पहुंचने वाला रक्त ही ऑक्सीजन और पोषक तत्वों का मुख्य वाहक है। रक्त प्रवाह में कमी सीधे तौर पर संज्ञानात्मक गिरावट (Cognitive Decline) और वृद्धावस्था से जुड़ी है।
  • व्यक्तिगत प्रयोग: दीपिंदर गोयल स्वयं पिछले एक वर्ष से इसका उपयोग डेटा एकत्रित करने के लिए कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट फिलहाल व्यावसायिक बिक्री के लिए नहीं बल्कि केवल वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए है।

Gravity Ageing Hypothesis: उम्र बढ़ने का नया सिद्धांत

इस रिसर्च का मूलाधार दीपिंदर गोयल की ‘ग्रैविटी एजिंग हाइपोथीसिस’ है। यह थ्योरी गुरुत्वाकर्षण और मानव शरीर की ऊर्ध्वाधर (Vertical) संरचना के संबंध पर आधारित है।

  • गुरुत्वाकर्षण का तर्क: चूंकि मानव मस्तिष्क हृदय के ऊपर स्थित है, इसलिए रक्त को गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध ऊपर चढ़ना पड़ता है। थ्योरी के अनुसार, दशकों तक सीधे खड़े रहने से दिमाग तक रक्त का पहुंचना कठिन होता जाता है, जिससे दिमाग जल्दी बूढ़ा होने लगता है।
  • योग और प्रकृति से तुलना: इस अनुसंधान में चमगादड़ (जो उल्टे लटकते हैं) और शीर्षासन जैसे योग मुद्राओं का हवाला दिया गया है, जहाँ सिर दिल से नीचे रहता है, जिससे रक्त प्रवाह सुगम होता है।

आर्थिक निवेश एवं भविष्य की राह

  • दीपिंदर गोयल ने इस अनुसंधान के लिए ‘Continue Research’ नामक पहल में लगभग 25 मिलियन डॉलर (₹225 करोड़) की अपनी निजी पूंजी लगाई है। यह स्पष्ट किया गया है कि इसका जोमैटो के फूड बिजनेस से कोई लेना-देना नहीं है। भले ही वैज्ञानिक समुदाय में इस हाइपोथीसिस को लेकर मतभेद हों, किंतु इतने बड़े स्तर पर डेटा संग्रहण भविष्य में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के उपचार में नए द्वार खोल सकता है।

निष्कर्षतः, दीपिंदर गोयल का ‘Temple’ डिवाइस मात्र एक गैजेट नहीं, बल्कि मानव सीमाओं को चुनौती देने का एक साहसिक प्रयास है। जहाँ दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर केंद्रित है, वहाँ जैविक उम्र को गुरुत्वाकर्षण के दृष्टिकोण से समझना निश्चित ही क्रांतिकारी है। आने वाले समय में इस रिसर्च से निकलने वाले परिणाम तय करेंगे कि क्या हम अपनी आयु की समय-सीमा को पुनः लिख पाएंगे।

Team The Loktantra

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