द लोकतंत्र : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) के स्वामी एलन मस्क ने अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल ‘Grok’ को लेकर वैश्विक स्तर पर एक कड़ी चेतावनी जारी की है। मस्क ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई उपयोगकर्ता ग्रोक एआई का उपयोग गैरकानूनी अथवा आपत्तिजनक सामग्री सृजित करने के लिए करता है, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही की जाएगी। मस्क का यह बयान भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी किए गये सख्त ‘टेकडाउन’ आदेश के तुरंत बाद आया है, जिसने प्लेटफॉर्म पर फैल रही अश्लील और अभद्र सामग्री पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
उपयोगकर्ता की जवाबदेही: मस्क का तर्क
एलन मस्क ने एआई द्वारा उत्पन्न सामग्री की जिम्मेदारी को लेकर एक पुरानी उपमा का सहारा लिया।
- कलम और उपयोगकर्ता: मस्क ने कहा कि जैसे किसी विवादास्पद लेखन के लिए लेखक की लेखनी अथवा कलम को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, वैसे ही एआई टूल को उत्तरदायी नहीं बनाया जा सकता। ग्रोक का आउटपुट पूर्णतः यूजर द्वारा दिए गए ‘प्रॉम्प्ट’ या इनपुट पर आधारित होता है।
- दंडात्मक कार्यवाही: मस्क ने चेतावनी दी कि अवैध कंटेंट बनाने वालों के साथ वही बदलाव किया जाएगा जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन करने वालों के साथ होता है।
भारत सरकार का सख्त अल्टीमेटम: 72 घंटे की समयसीमा
भारत सरकार ने इस विषय पर अत्यंत आक्रामक रुख अपनाया है। मंत्रालय ने X को निर्देश दिया है कि वह सभी आपत्तिजनक लिंक्स को तत्काल प्रभाव से हटाए।
- अनुपालन रिपोर्ट: सरकार ने प्लेटफॉर्म को 72 घंटे के भीतर एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट जमा करने को कहा है। इसमें हटाए गए कंटेंट और भविष्य में इसे रोकने के लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा होना चाहिए।
- महिला सुरक्षा पर चिंता: राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी द्वारा केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को लिखे गए पत्र ने इस मामले को राजनीतिक और सामाजिक मुख्यधारा में ला दिया है। आरोप है कि ग्रोक एआई का दुरुपयोग करके महिलाओं की ‘डीपफेक’ और अश्लील तस्वीरें बनाई जा रही हैं।
विधिक निहितार्थ एवं भविष्य का संकट
- आईटी नियमों के तहत, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एक ‘मध्यस्थ’ (Intermediary) के रूप में तभी तक छूट प्राप्त है जब तक वे गैरकानूनी सामग्री के खिलाफ सजग रहें। यदि X सरकार के नयाचारों का पालन करने में विफल रहता है, तो वह अपनी कानूनी सुरक्षा (Safe Harbor) खो सकता है, जिसका अर्थ होगा कि प्लेटफॉर्म पर अपलोड होने वाले हर कंटेंट के लिए स्वयं कंपनी जिम्मेदार होगी।
निष्कर्षतः, एआई क्रांति अपने साथ नैतिक और कानूनी जटिलताएं लेकर आई है। एलन मस्क की चेतावनी यह दर्शाती है कि तकनीकी कंपनियां अब नियामक दबाव को महसूस कर रही हैं। भारत जैसे बड़े बाजार में संचालन के लिए स्थानीय कानूनों और नैतिक मानकों का सम्मान अनिवार्य है। 72 घंटे की यह अवधि तय करेगी कि भविष्य में एआई और सोशल मीडिया का सह-अस्तित्व कितना सुरक्षित होगा।

