द लोकतंत्र : डिजिटल संचार के वैश्विक स्तंभ Gmail को लेकर एक गंभीर तकनीकी विवाद उत्पन्न हो गया है। प्रख्यात टेक एक्सपर्ट और इंजीनियरिंग विशेषज्ञ डेवरी जोन्स (Davery Jones) ने यह दावा कर तकनीकी जगत में हलचल पैदा कर दी है कि गूगल अपने कृत्रिम मेधा (AI) मॉडल्स को परिष्कृत करने के लिए करोड़ों यूजर्स के निजी ईमेल डेटा का उपयोग कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जीमेल के भीतर ‘स्मार्ट फीचर्स’ के नाम पर कुछ ऐसी सेटिंग्स डिफॉल्ट रूप से सक्रिय रहती हैं, जो एआई को यूजर्स के इनबॉक्स, संदेशों के प्रारूप और अटैचमेंट्स तक निर्बाध पहुंच प्रदान करती हैं। यह मुद्दा तब और संवेदनशील हो गया जब यह पता चला कि अधिकांश यूजर्स अनजाने में ही इस डेटा प्रोसेसिंग के लिए ‘ऑप्ट-इन’ (Opt-in) हैं।
डेटा एक्सेस का तकनीकी तंत्र: कैसे काम करते हैं ‘स्मार्ट फीचर्स’
गूगल के इकोसिस्टम में एआई की भूमिका अब केवल सहायक तक सीमित नहीं है। ‘Ask Gemini’ और ‘Google Assistant’ जैसे उपकरण इनबॉक्स के डेटा का विश्लेषण कर उत्तर तैयार करते हैं।
- डेटा माइनिंग का आधार: एक्सपर्ट्स के अनुसार, ‘Smart Features’ और ‘Workspace Smart Features’ की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर डेटा प्रोसेसिंग से जुड़ी है। जब ये फीचर्स ऑन होते हैं, तो एआई ईमेल की सामग्री को ‘रीड’ कर सुझाव, सारांश (Summary) और स्मार्ट रिप्लाई तैयार करता है। विशेषज्ञों का तर्क है कि इस प्रक्रिया में डेटा का गुप्त रूप से एआई ट्रेनिंग के लिए स्थानांतरण संभव है।
- अटैचमेंट्स पर जोखिम: चिंताजनक पहलू यह है कि एआई की पहुंच केवल टेक्स्ट संदेशों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पीडीएफ, इमेज और अन्य दस्तावेजों का भी विश्लेषण कर सकती है, जो कॉर्पोरेट गोपनीयता के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है।
सुरक्षा के उपाय: अपनी डिजिटल सीमाएं कैसे तय करें?
साइबर सुरक्षा विश्लेषकों ने यूजर्स को अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स की तत्काल समीक्षा करने की सलाह दी है। इसके लिए डेस्कटॉप और मोबाइल ऐप दोनों पर मैन्युअल हस्तक्षेप आवश्यक है।
- सेटिंग्स का प्रबंधन: Gmail के ‘See all settings’ विकल्प में जाकर ‘General’ टैब के तहत ‘Smart features’ को अनचेक करना पहला कदम है।
- वर्कस्पेस इंटीग्रेशन: इसके पश्चात ‘Manage Workspace smart feature settings’ के माध्यम से अन्य गूगल उत्पादों (जैसे डॉक्स या कैलेंडर) के साथ डेटा साझाकरण को रोकना अनिवार्य है। यद्यपि इससे एआई की कुछ सुविधाएं कम हो सकती हैं, किंतु डेटा की गोपनीयता सुनिश्चित होगी।
आधिकारिक खंडन और भविष्य की कानूनी दिशा
- गूगल ने इन दावों को पूरी तरह आधारहीन बताते हुए स्पष्ट किया है कि कंपनी जीमेल डेटा का उपयोग एआई मॉडल्स (जैसे जेमिनी) को ट्रेन करने के लिए नहीं करती। कंपनी के अनुसार, डेटा का प्रसंस्करण केवल फीचर की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए स्वचालित रूप से किया जाता है। हालांकि, 2026 के नए ‘डेटा प्राइवेसी कानूनों’ और ‘यूरोपीय संघ के एआई एक्ट’ जैसे वैश्विक नियामक ढांचे अब तकनीकी कंपनियों से अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। भविष्य में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या तकनीकी कंपनियां ‘प्राइवेसी-बाय-डिजाइन’ (Privacy-by-design) के सिद्धांत को अपनाती हैं या यूजर्स को सुविधाओं के बदले अपनी गोपनीयता का सौदा करना जारी रखना पड़ेगा।
निष्कर्षतः, जीमेल और एआई के बीच का यह संबंध तकनीकी प्रगति और व्यक्तिगत प्राइवेसी के बीच के संघर्ष को रेखांकित करता है। यद्यपि गूगल सुरक्षा का आश्वासन देता है, किंतु टेक एक्सपर्ट्स की चेतावनी यह संकेत देती है कि यूजर्स को अब ‘टर्म्स एंड कंडीशन्स’ को बिना पढ़े स्वीकार करने की आदत बदलनी होगी। सतर्कता और सही प्राइवेसी सेटिंग्स ही इस डिजिटल युग में सुरक्षित रहने का एकमात्र मार्ग हैं।

