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Iran-Israel Conflict: मिडिल ईस्ट की जंग से भारत की अर्थव्यवस्था पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, 6 बड़े सेक्टर संकट में

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द लोकतंत्र : ईरान-इज़रायल के बीच जारी तनाव अब भारतीय बाज़ार के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। वाणिज्य मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि पश्चिम एशिया (West Asia) को होने वाले भारत के 56% निर्यात पर सीधा असर पड़ा है। जहाजों को लंबे रास्तों से भेजा जा रहा है, जिससे माल पहुँचाने की लागत और समय दोनों बढ़ गए हैं।

थाली से गायब हो सकती है बासमती और फल

भारत के बासमती चावल, ताजे फलों और समुद्री उत्पादों (सी-फूड) के लिए मिडिल ईस्ट सबसे बड़ा बाजार है। हवाई और समुद्री माल-भाड़ा बढ़ने से फलों और सब्जियों के रास्ते में ही खराब होने का डर सता रहा है। इतना ही नहीं, बासमती चावल के कारोबारियों का पेमेंट फंस रहा है और उनका पैसा रोटेट नहीं हो पा रहा है।

खेती-किसानी पर खाद का संकट

सबसे बड़ी चिंता खाद को लेकर है। यूरिया बनाने के लिए जरूरी एलएनजी (LNG) की सप्लाई रुकने के कगार पर है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो मानसून के सीजन से पहले देश में नाइट्रोजन खाद की भारी किल्लत हो सकती है, जिसका सीधा असर हमारी फसलों पर पड़ेगा।

इंजीनियरिंग और लोहे का कारोबार जाम

भारत से बड़ी मात्रा में लोहा, स्टील और मशीनरी मिडिल ईस्ट भेजी जाती है। लेकिन जहाजों को अब ‘वॉ़र रिस्क सरचार्ज’ (युद्ध का अतिरिक्त टैक्स) देना पड़ रहा है। साथ ही, फैक्ट्रियों को मिलने वाली एलपीजी-पीएनजी की सप्लाई पर दबाव बढ़ने से उत्पादन भी धीमा पड़ गया है।

सोना-चांदी और गहनों पर दोहरी मार

भारत के रत्न एवं आभूषण उद्योग के लिए खाड़ी देश खरीदार भी हैं और सप्लायर भी। एक तरफ वहां से कच्चा हीरा और सोने की ईंटें (Gold Bars) आना मुश्किल हो गया है, वहीं दूसरी तरफ वहां रहने वाले भारतीयों के लिए बनाए गए खास गहनों का निर्यात ठप पड़ गया है।

दवाइयां बनाना होगा महंगा

भारत दुनिया का ‘फार्मेसी हब’ है, लेकिन दवा बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल (API) और विलायक (Solvents) इसी रास्ते से आते हैं। गैस की कमी से दवा फैक्ट्रियों में उत्पादन रुक रहा है। यहाँ तक कि दवाइयों की पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक और कांच भी अब महंगा हो रहा है।

छोटे उद्योगों (MSME) की बढ़ी मुश्किलें

कपड़ा, कृषि और पैकेजिंग इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर (PE और PP) के दाम आसमान छू रहे हैं। इससे छोटे और मध्यम दर्जे की कंपनियों के पास कच्चे माल का संकट खड़ा हो गया है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर बढ़ते दबाव ने एलपीजी और तेल की सप्लाई को भी जोखिम में डाल दिया है।

सरकार ने क्या उठाया कदम?

संकट को देखते हुए सरकार ने निर्यातकों को बड़ी राहत दी है। एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (ECGC) अब 100% बीमा कवर देगा और इसके लिए कोई एक्स्ट्रा प्रीमियम भी नहीं लिया जाएगा। इसका मतलब है कि अगर किसी निर्यातक का पैसा फंसता है, तो उसका जोखिम अब सरकार उठाएगी।

Team The Loktantra

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