द लोकतंत्र : डिजिटल इंडिया के दौर में संपर्क-रहित भुगतान (Contactless Payment) ने लेनदेन को अत्यंत सुगम बना दिया है। किंतु, यही सुविधा अब साइबर अपराधियों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। देश भर में ‘टैप एंड पे’ (Tap and Pay) स्कैम के मामलों में अचानक आई तेजी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस नई पद्धति में ठगों को न तो आपके वन-टाइम पासवर्ड (OTP) की आवश्यकता है और न ही पिन नंबर की। वे महज आपकी जेब के पास मशीन सटाकर आपका खाता साफ कर रहे हैं।
तकनीकी कार्यप्रणाली: NFC और POS मशीन का खतरनाक गठजोड़
इस घोटाले के पीछे ‘नियर फील्ड कम्युनिकेशन’ (NFC) तकनीक कार्य करती है, जो बिना किसी भौतिक संपर्क के डेटा स्थानांतरित करती है।
- भीड़ का फायदा: अपराधी अक्सर मॉल, मेट्रो स्टेशन या भीड़भाड़ वाले बाजारों का चयन करते हैं। वे अपनी हथेली में एक छोटी पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीन छिपाकर रखते हैं, जिसमें एक निश्चित राशि (जैसे ₹2000 से कम) पहले से दर्ज होती है।
- क्षणभर में सेंधमारी: जैसे ही वे पीड़ित के पास से गुजरते हैं और मशीन को उसकी पॉकेट या पर्स के समीप स्पर्श करते हैं, NFC सिग्नल के जरिए ट्रांजैक्शन सफल हो जाता है। यह पूरी प्रक्रिया महज 2-3 सेकंड में संपन्न होती है, जिसकी भनक पीड़ित को तब तक नहीं लगती जब तक मोबाइल पर पैसे कटने का संदेश नहीं आता।
निवारक उपाय: अपनी डिजिटल पूंजी को कैसे रखें सुरक्षित?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सतर्कता और तकनीकी सेटिंग्स में बदलाव ही इस ठगी से बचने का सटीक तरीका है।
- NFC सर्विस को नियंत्रित करें: अपने बैंक के मोबाइल ऐप में लॉग-इन कर ‘कार्ड कंट्रोल’ सेक्शन में जाएं। वहाँ ‘Contactless Payment’ या ‘NFC’ सुविधा को बंद कर दें। यदि आप इस सुविधा का उपयोग करना चाहते हैं, तो ट्रांजैक्शन लिमिट को न्यूनतम (जैसे ₹500) कर दें।
- RFID-Blocking Wallet का प्रयोग: बाजार में अब ऐसे वॉलेट उपलब्ध हैं जिनमें आरएफआईडी ब्लॉकिंग लेयर होती है। यह लेयर बाहरी स्कैनर की तरंगों को कार्ड तक पहुंचने से रोकती है, जिससे आपका कार्ड जेब के भीतर पूर्णतः सुरक्षित रहता है।
आपातकालीन कार्यवाही: धोखाधड़ी होने पर क्या करें?
- यदि आप अनधिकृत ट्रांजैक्शन का शिकार होते हैं, तो समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। तत्काल अपने बैंक को सूचित करके कार्ड को ब्लॉक करवाएं। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार के ‘संचार साथी’ पोर्टल अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन (1930) पर तुरंत रिपोर्ट दर्ज करें। आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि आप 3 दिनों के भीतर रिपोर्ट करते हैं, तो रकम वापस मिलने की संभावना सर्वाधिक होती है।
निष्कर्षतः, तकनीकी सुविधाएं जहाँ जीवन आसान बनाती हैं, वहीं सावधानी हटने पर बड़ी हानि का कारण भी बन सकती हैं। ‘टैप एंड पे’ एक बेहतरीन सुविधा है, किंतु इसे अपनी शर्तों पर उपयोग करना ही बुद्धिमानी है। आज ही अपने बैंकिंग ऐप की जांच करें और आवश्यक सुरक्षा उपायों को सक्रिय करें।

