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रंगीन क्यों नहीं होते स्मार्टफोन के चार्जर? जानें ब्लैक और व्हाइट कलर के पीछे का छिपा तर्क

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द लोकतंत्र : आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन कंपनियां उपकरणों के रंग और सौंदर्य (Aesthetics) पर अरबों डॉलर व्यय करती हैं। बाजार में इंद्रधनुषी रंगों के हैंडसेट उपलब्ध हैं, किंतु जब बात चार्जर की आती है, तो वैश्विक स्तर पर कंपनियां केवल काले या सफेद रंग तक ही सीमित रहती हैं। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि कठोर सुरक्षा मानकों, थर्मल मैनेजमेंट और औद्योगिक अर्थशास्त्र का एक सोचा-समझा परिणाम है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, चार्जर का रंग उपकरण की कार्यक्षमता और उपयोगकर्ता की सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

थर्मल मैनेजमेंट: हीट डिसिपेशन का भौतिक विज्ञान

चार्जिंग की प्रक्रिया के दौरान विद्युत ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा ऊष्मा (Heat) के रूप में परिवर्तित होता है।

  • ऊष्मा का निकासी मार्ग: ब्लैक और व्हाइट कलर के पॉलिमर में ऊष्मा को अवशोषित करने और उसे वातावरण में छोड़ने (Radiate) की क्षमता रंगीन प्लास्टिक की तुलना में अधिक स्थिर होती है। सफेद रंग जहाँ बाहरी गर्मी को परावर्तित करता है, वहीं काला रंग आंतरिक गर्मी को तेजी से बाहर निकालने में सक्षम होता है।
  • ओवरहीटिंग से बचाव: रंगीन पिगमेंट (Pigments) प्लास्टिक की थर्मल कंडक्टिविटी को बदल सकते हैं, जिससे चार्जर के भीतर गर्मी ट्रैप होने का जोखिम बढ़ जाता है। अतः न्यूट्रल रंगों का चुनाव एक सुरक्षित वैज्ञानिक निर्णय है।

सुरक्षा प्रोटोकॉल: प्रमाणन और अग्नि रोधी परीक्षण

किसी भी इलेक्ट्रॉनिक चार्जर को व्यावसायिक उत्पादन से पूर्व फायर सेफ्टी और शॉर्ट-सर्किट जैसे कठोर परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।

  • मानकीकृत प्लास्टिक फॉर्मूला: कंपनियां जिस ABS (Acrylonitrile Butadiene Styrene) प्लास्टिक का उपयोग करती हैं, वह काले और सफेद रंग में पहले से ही परीक्षित और सर्टिफाइड होता है।
  • अनुपालन में सुविधा: यदि कोई कंपनी लाल या नीले रंग का चार्जर बनाती है, तो उसे प्रत्येक नए रंग के रिएक्शन और ज्वलनशीलता (Flammability) के लिए नए सिरे से अप्रूवल लेना होगा, जो उत्पादन प्रक्रिया में देरी और लागत में वृद्धि करता है।

व्यावसायिक रणनीति: सप्लाई चेन और लागत प्रभावशीलता

  • आर्थिक दृष्टिकोण से भी रंगीन चार्जर घाटे का सौदा प्रतीत होते हैं। कंपनियों को हजारों अलग-अलग कलर वेरिएंट के लिए इन्वेंट्री मैनेज करने के बजाय एक यूनिवर्सल रंग बनाना अधिक किफायती पड़ता है। इसके अतिरिक्त, उपयोगकर्ताओं के लिए भी यह फायदेमंद है; चार्जर खो जाने या खराब होने पर किसी भी दुकान से ब्लैक या व्हाइट चार्जर खरीदना आसान होता है, क्योंकि इनकी उपलब्धता (Universal Availability) सुनिश्चित होती है।

निष्कर्षतः, स्मार्टफोन चार्जर का रंग केवल एक डिजाइन पसंद नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग की एक अनिवार्यता है। यद्यपि भविष्य में GaN (Gallium Nitride) जैसी नई तकनीकें चार्जर के आकार को छोटा कर रही हैं, किंतु सुरक्षा और थर्मल स्थिरता के मामले में ब्लैक और व्हाइट कलर का वर्चस्व बनाए रखने की संभावना है। सादगी और विज्ञान का यह तालमेल ही उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स का आधार है।

Team The Loktantra

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