द लोकतंत्र/ पटना : बिहार विधानसभा चुनाव के मतदान खत्म होते ही राजनीतिक तापमान चरम पर है। जहाँ टीवी चैनलों और सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल्स NDA सरकार की वापसी के संकेत दे रहे हैं, वहीं राजस्थान के मशहूर फ़लोदी सट्टा बाज़ार की भविष्यवाणी ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
फ़लोदी के हिसाब से इस बार खेल पलट सकता है और तेजस्वी यादव की RJD सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है। यह अंदाज़ा एग्जिट पोल्स से बिल्कुल उलट है और दोनों धड़ों में नई चर्चा छेड़ चुका है।
फलोदी सट्टा बाज़ार के मुताबिक़ एनडीए और महागठबंधन में कांटे की टक्कर
फ़लोदी का सट्टा बाज़ार, जो अक्सर चुनावी अनुमान में चर्चा में रहता है, इस बार बिहार के राजनीतिक समीकरणों को रोमांचक बना रहा है। बाज़ार में लग रहे दांव बताते हैं कि मुकाबला बेहद क़रीबी हो सकता है और सत्ता की चाबी निर्णायक आंकड़ों पर टिकी है।
सट्टा मार्केट के आंकड़ों के अनुसार, NDA को 105–135 सीटों और महागठबंधन को 97–127 सीटों मिलने के अनुमान हैं। यह अनुमान बताता है कि नतीजों में मामूली अंतर सत्ता पलट सकता है। वहीं अन्य दलों के खाते में 3–8 सीटें आने की संभावना जताई गई है। आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि बीजेपी–जेडीयू गठबंधन और RJD–कांग्रेस गठबंधन, दोनों ही सरकार बनाने की दौड़ में बराबरी पर खड़े हैं।
कांग्रेस के लिए फ़लोदी का सिग्नल बिल्कुल अच्छा नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह कि बाज़ार RJD को 75 सीटों से अधिक मिलते हुए देख रहा है, यानी तेजस्वी यादव की पार्टी सबसे आगे रह सकती है। बीजेपी दूसरे और जेडीयू तीसरे नंबर पर फिसल सकती है। कांग्रेस के लिए फ़लोदी का सिग्नल बिल्कुल अच्छा नहीं। सट्टा बाज़ार के अनुसार पार्टी 20 सीटें भी पार नहीं कर पाएगी।
मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं पर भी सट्टा बाज़ार ने अपना हिशाब लगा दिया है। एनडीए को बहुमत मिला तो भी नीतीश कुमार के चेयर पर बैठने की संभावना सिर्फ 60% बताई जा रही है। वहीं, बीजेपी के सीएम चेहरे की संभावना 20–25% दिख रही है। दूसरी तरफ अगर महागठबंधन सत्ता में आया तो तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने की संभावना 97% से अधिक बताई जा रही है यानी फ़लोदी के हिसाब से तेजस्वी की सीधी–सीधी ताजपोशी तय मानिए।
फलोदी के नतीजे कई बार साबित हुए हैं सही
ध्यान रहे, फ़लोदी सट्टा बाज़ार कोई आधिकारिक अनुमान नहीं है और सट्टेबाजी अवैध है, लेकिन दशकों से यह क्षेत्र राजनीतिक और खेली नतीजों में अपनी भविष्यवाणियों को लेकर चर्चा में रहता आया है। कई मौकों पर इसके अनुमान चौंकाने वाले तरीके से सही साबित हुए हैं, तो कई बार यह ट्रेंड से उलट भी गया है।
अब सवाल यह है कि बिहारी वोटर का असल फैसला किसके पक्ष में है, एग्जिट पोल्स की तरह एनडीए? या फिर फ़लोदी की तरह तेजस्वी यादव की RJD? 14 नवंबर को आने वाला नतीजा बताएगा कि इस बार जनता ने किसे बिखरा विश्वास दिया। अनुभवी नीतीश कुमार को या युवा चेहरा तेजस्वी यादव को। फिलहाल, एक बात तय है बिहार की सत्ता की जंग इस बार पूरी तरह रोमांच से भरी हुई है।

