द लोकतंत्र : आज देशभर में विजयादशमी (दशहरा 2025) का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता है कि दशहरे के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का संहार किया था। इसी वजह से यह पर्व शक्ति और धर्म की विजय का संदेश देता है।
दशहरे की प्रमुख परंपराओं में से एक है रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन। यह केवल आतिशबाजी और उत्सव नहीं है, बल्कि जीवन की बुराइयों जैसे अहंकार, लोभ, क्रोध और अधर्म को खत्म करने का प्रतीक भी है।
प्रदोष काल में क्यों किया जाता है रावण दहन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद और रात होने से पहले का समय, रावण दहन के लिए सबसे शुभ माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि भगवान श्रीराम ने इसी काल में रावण का वध किया था। इसी वजह से दशहरे पर रावण दहन का आयोजन प्रदोष काल में ही किया जाता है।
आपके शहर में रावण दहन का समय (Ravan Dahan 2025 Muhurat Citywise)
नई दिल्ली – 06:05 PM से 07:10 PM
नोएडा – 06:05 PM से 07:10 PM
लखनऊ – 06:05 PM से 07:10 PM
कानपुर – 06:05 PM से 07:10 PM
जयपुर – 06:16 PM से 07:10 PM
अयोध्या – 05:46 PM से 07:10 PM
वाराणसी – 05:45 PM से 07:10 PM
मुंबई – 06:26 PM से 07:10 PM
पटना – 05:36 PM से 07:10 PM
चंडीगढ़ – 06:10 PM से 07:10 PM
रांची – 06:39 PM से 07:10 PM
पुणे – 06:22 PM से 07:10 PM
कोलकाता – 05:23 PM से 07:10 PM
जम्मू – 06:14 PM से 07:10 PM
देहरादून – 06:02 PM से 07:10 PM
मैसूर – 06:06 PM से 07:11 PM
रावण दहन का महत्व
रावण दहन केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि अच्छाई और सत्य की हमेशा विजय होती है। इस दिन लोग संकल्प लेते हैं कि वे अपने जीवन से बुराइयों को दूर करेंगे और धर्म, सत्य तथा करुणा के मार्ग पर चलेंगे।
दशहरा हमें यह प्रेरणा देता है कि चाहे अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, अंततः प्रकाश की जीत निश्चित है।

