द लोकतंत्र/ पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, सियासी बयानबाजी भी तेज होती जा रही है। हाल के दिनों में चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा शुरू की गई मतदाताओं की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए थे। इस पर अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने करारा जवाब दिया है।
उन्होंने कहा, SIR देश में पहली बार नहीं हुआ है। यह राहुल गांधी की दादी के पिताजी के समय भी हुआ था, उनकी दादी के समय भी और उनकी माताजी के समय भी। राहुल गांधी को यह जानकारी नहीं है। शाह ने तंज कसते हुए कहा, मैं राहुल गांधी से बस एक सवाल पूछना चाहता हूं- क्या मतदाता सूची का शुद्धिकरण होना चाहिए या नहीं?
अमित शाह ने राहुल गांधी से पूछा सीधा सवाल
अमित शाह ने आजतक के एक कार्यक्रम में कहा कि मतदाता सूची से फर्जी नामों को हटाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा, अगर कोई मुस्लिम घुसपैठिया (illegal immigrant) है, तो क्या उसे सिर्फ धर्म के नाम पर मतदाता सूची में बने रहना चाहिए? घुसपैठियों में धर्म जोड़ना सबसे बड़ा पाप है। यह हमारे लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहा है।
शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी और INDI अलायंस को दर्द इस बात का है कि सीमांचल क्षेत्र में उनके कई वोटर, जो वास्तव में घुसपैठिए हैं, अब मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। उनका वोट बैंक प्रभावित हो रहा है, इसलिए वे इसका विरोध कर रहे हैं।
‘घुसपैठिया बचाओ यात्रा’ पर शाह का तंज
गृह मंत्री ने कहा कि INDI गठबंधन ने हाल ही में जो ‘घुसपैठिया बचाओ यात्रा’ निकाली, वह इसी चिंता का परिणाम है। शाह ने कहा, 2003 के बाद से कई विदेशी नागरिक फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए भारत की मतदाता सूची में नाम जोड़ने में सफल हुए हैं। ऐसे लोग हमारे लोकतंत्र की विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं। मैं देशवासियों से पूछता हूं जो लोग बांग्लादेश या दूसरे देशों से अवैध रूप से आए हैं, क्या उन्हें भारत के चुनाव में वोट देने का अधिकार होना चाहिए?
पहले पहचान, फिर हटाना और डिपोर्ट करना हमारा एजेंडा
अमित शाह ने दो टूक कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का स्पष्ट एजेंडा है, पहले घुसपैठियों की पहचान की जाएगी, फिर उन्हें मतदाता सूची से हटाया जाएगा और अंत में उन्हें देश से डिपोर्ट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस प्रक्रिया को सांप्रदायिक रंग देकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बीजेपी कानून और संविधान के दायरे में रहकर कार्रवाई करेगी।
बिहार चुनाव को लेकर शाह ने कहा कि बीजेपी हमेशा अपनी ताकत, लोकप्रियता और संगठन के बल पर चुनाव लड़ती है। उन्होंने कहा, विपक्ष की कमजोरी हमारी ताकत नहीं है। हम नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार चुनाव लड़ रहे हैं और वही हमारे गठबंधन के नेता हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की जनता लालू राज को अच्छी तरह देख चुकी है। लालू राज की वापसी का मतलब होगा 21वीं सदी में फिर से जंगलराज की वापसी।
कुल मिलाकर, अमित शाह के बयानों ने बिहार चुनावी माहौल में नई गर्मी ला दी है। एक ओर बीजेपी SIR को मतदाता सूची की शुद्धता का कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की साजिश बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा चुनावी बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है।

