द लोकतंत्र/ पटना : भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव ने शुक्रवार (17 अक्टूबर, 2025) को आरजेडी (RJD) के टिकट पर छपरा सीट से अपना नामांकन दाखिल किया। खास बात यह है कि इस सीट से पहले उनकी पत्नी चंदा देवी के चुनाव लड़ने की संभावना थी, लेकिन अब खुद खेसारी लाल यादव ने मैदान संभाल लिया है। गुरुवार को खेसारी लाल यादव और उनकी पत्नी ने आरजेडी की सदस्यता ली थी।
नामांकन दाखिल करने के बाद खेसारी लाल यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा, मैं चाहता था कि मेरी पत्नी चुनाव लड़े, मैं खुद राजनीति में नहीं आना चाहता था। लेकिन छपरा की समस्याओं ने मुझे सोचने पर मजबूर किया। संगीत को मैं पूरी तरह नहीं छोड़ूंगा, बस थोड़ा वक्त राजनीति को दूंगा, क्योंकि यहां जनता को बहुत उम्मीदें हैं। इस बार की बारिश में डीएम ऑफिस तक पानी भर गया था, ये स्थिति बदलनी जरूरी है।
बदलाव जरूरी है, वरना हमें भी बदलना पड़ेगा
अपने राजनीतिक विजन को लेकर खेसारी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता छपरा की शिक्षा व्यवस्था को सुधारना है। उन्होंने कहा, जिस तरह मेरे बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ते हैं, वैसा ही अवसर हर बच्चे को मिलना चाहिए। तेजस्वी भैया और महागठबंधन का संकल्प है कि बिहार में पलायन को रोकना है। अब समय है बदलाव का, अगर जनता को लगे कि हम सही नहीं हैं, तो हमें भी बदल देना चाहिए।
बिहारी शब्द को गाली समझा जाता है, अब ये नजरिया बदलना है
खेसारी लाल यादव ने बिहारी पहचान को लेकर भी भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा, जब कोई ‘बिहारी’ कहता है तो जैसे किसी गाली की तरह बोला जाता है। जबकि हम मेहनतकश लोग हैं, हर शहर में मजदूरी करते हैं। अगर हम अपने ही घर में मेहनत करें, अपने ही गांव में काम करें, तो कोई हमें मजदूर नहीं कहेगा। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य है कि छपरा और बिहार के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, ताकि पलायन की मजबूरी खत्म हो सके।
छपरा सीट पर कड़ी टक्कर के आसार
बता दें कि छपरा विधानसभा सीट पर लंबे समय से बीजेपी का प्रभाव रहा है। मौजूदा विधायक डॉ. सी.एन. गुप्ता लगातार दो बार इस सीट से जीत दर्ज कर चुके हैं। हालांकि, इस बार बीजेपी ने टिकट बदलते हुए छोटी कुमारी को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में आरजेडी से खेसारी लाल यादव की एंट्री से मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
भोजपुरी सिनेमा से राजनीति के मैदान में उतरे खेसारी लाल यादव की एंट्री ने छपरा की सियासत को गर्मा दिया है। जहां एक ओर वे ‘छपरा के विकास’ और ‘बिहारी पहचान की गरिमा’ की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनका स्टारडम आरजेडी को नई ताकत दे सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता ‘सुपरस्टार खेसारी’ को नेता के रूप में कितना अपनाती है।

