द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता को लेकर शनिवार को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत अपने किसानों, मछुआरों और छोटे उद्योगों (MSME) के हितों से किसी भी हाल में समझौता नहीं करेगा। गोयल ने दो टूक शब्दों में कहा, देशहित हमारे लिए सर्वोपरि है, भारत किसी भी विदेशी दबाव में झुकने वाला नहीं।
गोयल ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत सकारात्मक स्तर पर चल रही है और कई अहम बिंदुओं पर सहमति भी बनी है। उन्होंने कहा कि हाल ही में भारत का प्रतिनिधि दल वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों से मिला, जहां व्यापार, कृषि और निवेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत के किसानों, मछुआरों और MSME सेक्टर के अधिकार और हित पूरी तरह सुरक्षित रहें।
भारत और अमेरिका के बीच मित्रतापूर्ण संबंध
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच मित्रतापूर्ण संबंध हैं, लेकिन जब बात देश की अर्थव्यवस्था और किसानों की आती है, तो कोई रियायत संभव नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका की ओर से कृषि क्षेत्र में रियायतें देने की मांग की गई थी, लेकिन भारत सरकार ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया।
गोयल ने कहा, हमारे किसान देश की रीढ़ हैं। अगर हमें वैश्विक व्यापार में आगे बढ़ना है, तो यह सुनिश्चित करना होगा कि किसान, मछुआरे और MSME मजबूत हों। भारत किसी भी व्यापार समझौते में अपने लोगों के हितों से समझौता नहीं करेगा।
भारत कूटनीति और संवाद के ज़रिए इस विवाद को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहा
बताया गया कि वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल की अगुवाई में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में वाशिंगटन में तीन दिवसीय वार्ता में हिस्सा लिया था, जो 17 अक्टूबर को समाप्त हुई। यह चर्चा अब तक पांचवें दौर में पहुंच चुकी है और दोनों पक्षों ने इसे ‘सकारात्मक और रचनात्मक’ बताया है।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% तक के टैरिफ लगाने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया था। ट्रंप प्रशासन के दौरान यह टैरिफ नीति और कड़ी हुई, जिसके चलते भारत ने भी जवाबी कदम उठाए। इसके अलावा, रूस से कच्चा तेल खरीदने पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 25% अतिरिक्त शुल्क ने स्थिति को और जटिल बना दिया। फिर भी पीयूष गोयल का कहना है कि भारत कूटनीति और संवाद के ज़रिए इस विवाद को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, हम टकराव नहीं, सहयोग चाहते हैं। लेकिन किसी भी कीमत पर देश के हितों की रक्षा हमारी प्राथमिकता रहेगी।
गोयल के इस बयान को भारत के किसान, उद्योगपति और MSME सेक्टर के लिए एक मजबूत संदेश माना जा रहा है कि केंद्र सरकार किसी भी वैश्विक दबाव में अपने हितों से पीछे नहीं हटेगी।

