द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : देश को 24 नवंबर को नया मुख्य न्यायाधीश मिलने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत को भारत के अगले चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफ़ारिश को मंजूरी दे दी है। मौजूदा CJI जस्टिस बी.आर. गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिसके बाद जस्टिस सूर्य कांत शपथ लेंगे।
उनके कार्यकाल की अवधि लगभग 15 महीने होगी और वह 9 फरवरी 2027 तक इस पद पर रहेंगे। महत्वपूर्ण बात यह है कि वह हरियाणा से आने वाले पहले मुख्य न्यायाधीश होंगे, जो इस राज्य के न्यायिक इतिहास में भी एक अहम पड़ाव है।
कौन हैं जस्टिस सूर्य कांत?
जस्टिस सूर्य कांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हिसार, हरियाणा में हुआ था। साधारण परिवार से आने वाले जस्टिस कांत का कानूनी सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। वर्ष 2000 में उन्हें हरियाणा का एडवोकेट जनरल नियुक्त किया गया, जिसके बाद 2004 में वह पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश बने।
न्यायपालिका में उनकी प्रतिबद्धता और दक्षता को देखते हुए 2018 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। इसके बाद 24 मई 2019 को वह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए और अब देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था की अगुवाई करने जा रहे हैं।
अपनी स्पष्टवादिता, संवेदनशीलता और न्यायिक दृष्टि के लिए विख्यात जस्टिस सूर्य कांत कोर्ट में अपनी बात दृढ़ता से रखने के लिए जाने जाते हैं। वह न्यायिक प्रक्रिया में वकीलों को पूरा अवसर देने और खासकर व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत होने वाले पक्षकारों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने के लिए पहचाने जाते हैं। कई बार उन्हें कोर्ट में परिवारिक सदस्य की तरह पक्षकारों की समस्याएँ सुनते और समाधान सुझाते हुए देखा गया है।
बिहार SIR सहित कई बड़े मामलों की सुनवाई
हाल ही में उन्होंने एक वकील द्वारा CJI पर जूता फेंकने की घटना को गंभीरता से लेते हुए भी उदार दृष्टिकोण दिखाया। उन्होंने अवमानना नोटिस जारी करने से इंकार करते हुए कहा कि कोर्ट आरोपी को महत्व नहीं देना चाहती और यह न्यायपालिका की परिपक्वता और धैर्य की मिसाल है।
जस्टिस सूर्य कांत इस समय कई अहम मामलों की सुनवाई कर रहे हैं, जिनमें बिहार SIR (मतदाता सूची पुनरीक्षण), शिवसेना चुनाव चिन्ह विवाद, अवैध घुसपैठियों का निष्कासन और डिजिटल अरेस्ट जैसे प्रमुख मामले शामिल हैं।
जस्टिस सूर्य कांत की नियुक्ति न केवल भारतीय न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है, बल्कि समाज के उस वर्ग के लिए भी प्रेरणादायक है जो साधारण पृष्ठभूमि से आकर उच्चतम मुकाम हासिल करने का सपना देखता है। आने वाले समय में न्यायिक सुधारों, न्यायिक पारदर्शिता और अदालतों में लंबित मामलों के समाधान पर उनकी नीतियों पर देश की निगाहें टिकी रहेंगी।

