द लोकतंत्र : भारतीय बुलियन बाजार में इन दिनों ऐतिहासिक उछाल देखा जा रहा है। सकारात्मक वैश्विक संकेतों और मजबूत औद्योगिक मांग के चलते चांदी ने ₹2 लाख प्रति किलोग्राम के अभूतपूर्व स्तर को पार कर लिया है। शुक्रवार (12 दिसंबर) को सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी बनी रही। MCX पर फरवरी वायदा कॉन्ट्रैक्ट 0.10 फीसदी की तेजी के साथ ₹1,32,599 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया।
चांदी का ऐतिहासिक सफर: ₹2 लाख के पार
बुलियन मार्केट की अग्रणी सलाहकार फर्म केडिया एडवाइजरी की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, चांदी ने सिर्फ 20 साल में ₹12,000 प्रति किलोग्राम (17 नवंबर 2005) से ₹2 लाख प्रति किलोग्राम तक का सफर तय किया है।
- नया उच्चतम स्तर: आज देश में एक किलो चांदी की कीमत ₹2,900 बढ़कर ₹2,00,900 के नए उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है। इसके अलावा, 100 ग्राम और 10 ग्राम चांदी का रेट क्रमशः ₹20,090 और ₹2,009 रुपये है।
- क्षेत्रीय दरें: दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में एक किलोग्राम चांदी की कीमत ₹1,97,900 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई, जबकि चेन्नई में यह ₹2,09,900 प्रति किलोग्राम के अत्यधिक स्तर पर पहुँच गई है।
गुरुवार को चांदी ने ₹1,98,814 प्रति किलोग्राम का ऑल-टाइम हाई भी छुआ था और 5.33 फीसदी की बढ़त के साथ ₹1,98,799 पर बंद हुई थी।
तेजी के पीछे के प्रमुख कारक
सोने और चांदी की कीमतों में यह मजबूती कई घरेलू और वैश्विक कारकों का परिणाम है:
- फेडरल रिजर्व की नीति: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है और अगले साल भी संभावित कटौती के संकेत दिए हैं। इससे डॉलर कमजोर होता है और सोने-चांदी जैसे गैर-उपज देने वाले एसेट में निवेश बढ़ता है।
- औद्योगिक मांग: पिछले साल के मुकाबले चांदी में अब तक 115 फीसदी की भारी तेजी आ चुकी है। इसकी वजह इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और अन्य तकनीकी उद्योगों में इसकी मजबूत डिमांड है।
- रणनीतिक महत्व: अमेरिका के महत्वपूर्ण खनिजों की सूची (Critical Minerals List) में चांदी का शामिल होना भी इसकी कीमतों को बल दे रहा है।
- कम इन्वेंट्री: बाजार में कम इन्वेंट्री और सप्लाई की तुलना में बढ़ती मांग ने कीमतों को ऊंचा रखा है।
फिलहाल, MCX के मार्च डिलीवरी वाले फ्यूचर ट्रेड चांदी 0.50 फीसदी फिसलकर ₹1,97,951 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है, जो निवेशकों द्वारा रिकॉर्ड स्तर पर प्रॉफिट बुकिंग का संकेत है। बावजूद इसके, दीर्घकालिक परिदृश्य में बुलियन मार्केट मजबूत बना हुआ है।

