द लोकतंत्र : भारतीय प्राथमिक बाजार (Primary Market) वर्ष 2025 का समापन एक महत्वपूर्ण पूंजीगत घटनाक्रम के साथ करने जा रहा है। हेल्थकेयर एवं डायग्नोस्टिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी ‘मॉर्डन डायग्नोस्टिक एंड रिसर्च सेंटर लिमिटेड’ (MDRC) अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लेकर आ रही है। 36.89 करोड़ रुपये का यह बुक बिल्ट इश्यू पूरी तरह से ‘फ्रेश इश्यू’ पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि जुटाई गई पूरी पूंजी कंपनी के विस्तार और विकास कार्यों में लगाई जाएगी। निवेशक इस आईपीओ के लिए 31 दिसंबर से बोली लगा सकेंगे।
प्राइस बैंड और लॉट साइज
कंपनी ने निवेशकों की विभिन्न श्रेणियों के लिए आकर्षक मूल्य दायरा निर्धारित किया है।
- कंपनी ने प्रति शेयर 85 रुपये से 90 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है।
- खुदरा निवेशकों के लिए न्यूनतम लॉट साइज दो तय किया है, जिसमें कुल 3200 शेयर होंगे। अपर प्राइस बैंड के हिसाब से एक रिटेल निवेशक को कम से कम 2.88 लाख रुपये का निवेश करना होगा।
- उच्च नेटवर्थ वाले व्यक्तियों (HNI) के लिए न्यूनतम 3 लॉट आरक्षित किए गए हैं।
1985 से विश्वसनीयता का सफर
मॉर्डन डायग्नोस्टिक महज एक प्रयोगशाला नहीं, बल्कि चिकित्सा परीक्षण के क्षेत्र में एक अनुभवी नाम है।
- कंपनी पैथोलॉजी (फॉरेंसिक, एनाटॉमिकल, मॉलिक्यूलर) के साथ-साथ रेडियोलॉजी सेवाएं जैसे CT Scan, MRI, मैमोग्राफी और अल्ट्रासाउंड प्रदान करने में विशेषज्ञता रखती है।
- वर्तमान में भारत के 8 राज्यों में इसके 21 सेंटर संचालित हैं, जिनमें 17 पूर्णकालिक प्रयोगशालाएं शामिल हैं।
रणनीतिक विस्तार की योजना
कंपनी प्रबंधन ने आईपीओ से प्राप्त होने वाली रकम के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट रूपरेखा तैयार की है: * तकनीकी अपग्रेड: नए और अत्याधुनिक मेडिकल इक्वीपमेंट की खरीद।
- कार्यशील पूंजी (Working Capital) की जरूरतों को पूरा करना और मौजूदा कर्ज का पुनर्भुगतान।
- सामान्य व्यावसायिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पूंजी का संचय।
निवेशक कैलेंडर
- सब्सक्रिप्शन अवधि: 31 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026।
- अलॉटमेंट अंतिम रूप: 5 जनवरी 2026 (संभावित)।
- शेयर लिस्टिंग: 7 जनवरी 2026 (BSE और NSE पर)।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि डायग्नोस्टिक सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए कंपनी का विस्तार मॉडल महत्वपूर्ण होगा। मॉर्डन डायग्नोस्टिक की पुरानी साख और फ्रेश इश्यू का स्वरूप निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
निष्कर्षतः, यदि आप हेल्थकेयर सेक्टर में दीर्घकालिक निवेश तलाश रहे हैं, तो यह आईपीओ एक विचारणीय विकल्प हो सकता है। हालांकि, किसी भी निवेश से पहले कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) का गहन अध्ययन अनिवार्य है।
डिस्क्लेमर: इस न्यूज में दी गई जानकारी सामान्य बाजार विश्लेषण और अनुमानों पर आधारित है। द लोकतंत्र निवेश की सलाह नहीं देता है। कोई भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

