द लोकतंत्र : आगामी 31 दिसंबर को जब संपूर्ण देश नए साल के जश्न की तैयारी कर रहा होगा, तब आपकी रसोई और पार्टी की जरूरतों को 8 से 10 मिनट में पूरा करने वाले ‘डिलीवरी पार्टनर्स’ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करते नजर आएंगे। जेप्टो, Blinkit, स्विगी और फ्लिपकार्ट जैसे क्विक कॉमर्स दिग्गजों के गिग वर्कर्स ने वेतन विसंगतियों और असुरक्षित कार्य स्थितियों के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। यह हड़ताल महज काम रोकने की घोषणा नहीं, बल्कि उस अल्ट्रा-फास्ट बिजनेस मॉडल पर गंभीर प्रश्नचिह्न है जो उपभोक्ता की सुविधा के लिए डिलीवरी बॉयज की जान दांव पर लगाता है।
10 मिनट की रेस कैसे होती है पूरी?
क्विक ई-कॉमर्स कंपनियां किसी जादू से नहीं, बल्कि ‘डार्क स्टोर्स’ की रणनीति से सामान पहुंचाती हैं।
- लॉजिस्टिक्स ढांचा: ये स्टोर रिहायशी क्षेत्रों के 2-3 किमी के दायरे में होते हैं। आदेश मिलते ही एल्गोरिदम सबसे करीबी स्टोर को सूचित करता है।
- मानवीय दबाव: दिक्कत तब शुरू होती है जब एल्गोरिदम ट्रैफिक, कोहरा और पार्किंग जैसी जटिलताओं को नजरअंदाज कर डिलीवरी बॉय पर समय का दबाव बनाता है। डिलीवरी पार्टनर्स का आरोप है कि यही ’10-मिनट मॉडल’ हादसों की मुख्य जड़ है।
गिग वर्कर्स का दर्द: अधिकार विहीन श्रम
हड़ताल का मुख्य कारण काम के घंटे और पारिश्रमिक के बीच का असंतुलन है।
- वेतन बनाम मेहनत: 15 घंटे काम करने के बाद भी शुद्ध आय मात्र 600 रुपये तक सिमित रहती है। वर्कर को किलोमीटर के हिसाब से 10 से 15 रुपये मिलते हैं, जबकि जोखिम शत-प्रतिशत उनका होता है।
- सुरक्षा की मांग: 2024 की रिपोर्ट के अनुसार अकेले सायबराबाद में 8 डिलीवरी बॉयज की मृत्यु हुई। उनकी प्रमुख मांग है कि दुर्घटना बीमा, सामाजिक सुरक्षा और कोहरे के दौरान रात 11 बजे के बाद सेवाएं बंद की जाएं।
- एल्गोरिदम की निरंकुशता: कस्टमर की एक एकतरफा शिकायत पर ID ब्लॉक कर देना उनके रोजगार को अस्थिर बनाता है।
यह संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है। 1998 में अमेरिका में विफल हुए इस मॉडल को कोविड के बाद भारत में आक्रामक तरीके से लागू किया गया। संसद में भी राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इन वर्कर्स की पीड़ा उठाकर इसे राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनाया था।
31 दिसंबर की हड़ताल क्विक कॉमर्स कंपनियों के लिए एक वेक-अप कॉल है। मुनाफाखोरी और मानवीय कल्याण के बीच एक संतुलन बनाना अब अनिवार्य हो गया है। यदि कंपनियां अपनी नीतियों में सुधार नहीं करतीं, तो उपभोक्ताओं का भरोसा और डिलीवरी नेटवर्क दोनों ही ध्वस्त हो सकते हैं। नए साल पर आपकी सुविधा किसी की जान की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।

